हापुड़। जिले की हवा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने करीब दो हजार फैक्टरियों को चिह्नित किया है। दिवाली से पहले इन सभी फैक्टरियों में प्रदूषण को कम करने के मानकों की जांच की जाएगी। ताकि हर वर्ष दिवाली के बाद फैलने वाले खतरनाक प्रदूषण को कम किया जा सके।
पिछले वर्ष जिले का प्रदूषण स्तर देश में कई बार नंबर एक पर आया था। इस वायु प्रदूषण के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। लोग लगातार श्वास, फेफड़ों और आंखों से संबंधित रोगों से बीमार हो रहे हैं। इस वायु प्रदूषण के बढ़ने के कई कारण हैं, इसमें औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, निर्माण कार्यों व सड़कों से उड़ने वाली धूल, कूड़ा जलाना और डीजल जनरेटर का इस्तेमाल प्रमुख हैं।
इसके अलावा ईंट-भट्ठों, कोयले व लकड़ी जैसे ईंधनों के जलने से भी प्रदूषण बढ़ता है। सर्दियों में हवा की गति कम होने और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। वहीं, एनसीआर में औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का सही इस्तेमाल नहीं होने के कारण भी वायु गुणवत्ता खराब होने का एक अहम कारण है। यही कारण है कि विभाग ने सभी ऐसी फैक्टरियों को चिह्नित किया है, जिनमें किसी न किसी रूप में ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है और वायु प्रदूषण फैलने का कारण है।
सितंबर में केंद्रीय टीम ने पकड़ी थी बड़ी लापरवाही
सितंबर माह में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में औद्योगिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की सात फ्लाइंग स्क्वॉड ने जिले में विशेष जांच अभियान चलाया था। इस दौरान कई इकाइयों से घना धुआं निकलता मिला था। कुछ स्थानों पर वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) पर्याप्त नहीं पाए गए, जबकि कई इकाइयों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित नहीं थी या ठीक से काम नहीं कर रही थी, जबकि कुछ इकाइयों में संचालन की सहमति (सीटीओ) और जनरेटर की क्षमता व ईंधन संबंधी विवरण में विसंगतियां मिली थीं। कई इकाइयां चिमनी से निकलने वाले उत्सर्जन की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा सकीं। कुछ चिमनियां उत्सर्जन विनियमन भाग-तीन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थीं। वहीं, इकाइयों में खतरनाक स्लज के साथ लकड़ी और कबाड़ भी चलता मिला था।
कोट
दिवाली से पहले जिले में सभी औद्योगिक फैक्टरियों का औचक निरीक्षण कर जांच की जाएगी। जिससे कि वायु प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके।
- विपुल कुमार, सहायक अभियंता, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड