गांव असौड़ा में आयोजित काव्य गोष्ठी में कविता सुनाते कवि। संवाद
हापुड़। गांव असौड़ा में कबीर साहित्य परिषद - भारत की मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़कर तालियां बटोरी। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कर डॉ.सागर ने सर्वधर्म समभाव की प्रार्थना कर किया। उन्होंने पढ़ा कि खुदगर्जी की ओढ़ के चादर सोए हुए हैं शहर के लोग, अपने मतलब की दुनिया में खोए हुए शहर के लोग। जमशेद माहिर ने पढ़ा कि हम से रसमन ही मिला है वो, मिला है जब भी कैसे ओरों से मिलता होगा।
विजय वत्स ने पढ़ा कि कि हम तो सबसे ही प्यार करते हैं। जान सब पर ही, निसार करते हैं। सुरेंद्र खेड़ा ने पढ़ा कि शक चोरी का था तो बताया क्यूं था, चोर को पड़ोस में बसाया क्यूं था। डॉ. सुनील सरकार ने पढ़ा कि कोई तो मिलेगा यूं सफर में, यूं बैचैन होना भी अच्छी बात नहीं। इस मौके पर हाफिज मोहम्मद अरशद, अंकित इंकलाब, मुकेश प्रजापति, विजय वर्मा हिंद, बुद्ध प्रकाश नबाव, सचिन सागर, लोकेश अकेला, रजनीश पायलेट आदि मौजूद रहे।