हापुड़। त्योहारों बाद खुली समितियों पर डीएपी के लिए शुक्रवार को मारामारी रही। इस दौरान गिरधरपुर समिति पर काफी हंगामा हुआ। किसानों ने चेहरा देखकर उर्वरक देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही नकद केंद्रों पर खाद किल्लत की समस्या रही।
आलू की बोआई का समय चल रहा है। इसमें किसानों को डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। किसान एक ही बार में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा एक आधार कार्ड पर दो से तीन कट्टा डीएपी दिया जाना ही सुनिश्चित किया गया है। किसानों में इससे असंतोष बढ़ रहा है।
शुक्रवार को गिरधरपुर समिति पर डीएपी के लिए मारामारी मच गई। किसानों ने काफी हंगामा भी किया। गांव निवासी व भाकियू नेता संदीप शर्मा ने बताया कि किसानों को चेहरा देखकर डीएपी दिया जा रहा है। किसी को आधार कार्ड पर एक ही कट्टा मिल रहा है तो किसी को पांच पांच भी दिए जा रहे हैं।
करीब एक सप्ताह बाद समिति खुली है। दिनभर समिति पर उर्वरकों के लिए मारामारी मची रही। बता दें कि इस समिति का गठन हाल ही में हुआ है, पहले यहां के किसान चमरी सोसायटी से जुड़े हुए थे।
इसके अलावा नकद केंद्रों पर भी उर्वरकों की किल्लत बनी रही। दूसरी समितियों पर भी डीएपी पाने के लिए किसानों में मारामारी रही। इस दौरान अधिकारियों ने टैगिंग पर भी नजर बनाकर रखी।
कोट -
जिले में डीएपी की कमी नहीं है, किसानों को आधार कार्ड पर उनकी जरूरत के अनुसार डीएपी दी जा रही है। जिले की समस्त समितियों पर डीएपी उपलब्ध है। - प्रेमशंकर, एआर कोऑपरेटिव।