हापुड़। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा हापुड़ जिले के 16 गांवों के अपने अधिकार क्षेत्र शामिल करने के प्रस्ताव को एचपीडीए (हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण) ने खारिज कर दिया है। एचपीडीए ने इन गांवों को देने से इन्कार करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है। वहीं धौलाना विधायक धर्मेश तोमर ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
शासन ने 2011 में हापुड़ को जिला बनाने के साथ ही तीन तहसीलें बना दीं। हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण जिला बनने के पहले से ही प्रथक है। प्राधिकरण में आसपास के ऐसे गांवों को भी इसमें शामिल कर दिया गया था जो गाजियाबाद जिले में पड़ते हैं। इसमें मोदीनगर क्षेत्र के पांच गांव और पिलखुवा क्षेत्र के 16 गांव भी एचपीडीए को मिले, लेकिन अब पिछले कुछ सालों में मसूरी से सटे गांवों को जीडीए की सीमा में शामिल करने की मांग उठ रही है। जीडीए ने 16 गांवों को अपने अधिकार में लेने का प्रस्ताव भी बना लिया और बोर्ड बैठक में रखने की तैयारी कर ली, लेकिन एचपीडीए ने इसे खारिज कर दिया है। वहीं, धौलाना विधायक धर्मेश तोमर ने भी इसका विरोध किया है। धौलाना विधायक का कहना है कि ये 16 गांव हापुड़ का हिस्सा हैं। यहां के लोगों को हापुड़ आने में 10 मिनट का समय लगता है, जबकि जीडीए में पहुंचने में एक घंटा। ऐसे में जनहित में भी इन गांवों को एचपीडीए में रखा जाना चाहिए। इस संबंध में मंडलायुक्त को भी अवगत कराकर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
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हम लगातार अपने क्षेत्र का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा प्राधिकरण छोटा है। जीडीए के प्रस्ताव को खारिज करते हुए पर हमने आपत्ति दर्ज करा दी है। - डॉ. नितिन गौड़, उपाध्यक्ष एचपीडीए।
हापुड़ के इन गांवों को शामिल करने का है प्रस्ताव
मसूरी (गंगा कैनाल के पूर्व एवं पश्चिम का संपूर्ण क्षेत्र), नाहल, मोहउद्दीनपुर डबारसी, निडोरी, मसौता, शामली, अफसरशाहपुर, अतरौली, अव्वलपुर, जोया, कनकपुर, औरंगाबाद दतेड़ी, मुकिमपुर, ईशकनगर, नहाली, नंगौला अमिरपुर