प्रदेश सरकार सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज और सुविधाएं देने के दावे करती है, लेकिन इसकी हकीकत एक दम परे है। बुधवार को जिला अस्पताल के रूप में संचालित गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर
इलाज नहीं मिलने से एक गर्भवती महिला घंटों प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। महिला चिकित्सक ने गर्भवती को इलाज देना तो दूर, देखना भी मुनासिब नहीं समझा। बाद में गर्भ में पल रहे बच्चे को कमजोर बताकर चिकित्सकों ने उसे मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया।
राजस्थान निवासी आरती पति हरकेश के साथ नगर के मोहल्ला चमरी में किराए के मकान में रहती है और नौ माह की गर्भवती है। बीते चार महीने से वह गढ़ रोड स्थित सीएचसी पर अपना इलाज करा रही थी।
बुधवार को उसे प्रसव पीड़ा हुई तो हरकेश उसे सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां चिकित्सकों की अनदेखी के चलते करीब एक घंटा तक वह फर्श पर इलाज के लिए तड़पती रही। महिला चिकित्सक को कई बार हरकेश ने पत्नी की स्थिति से अवगत कराया,
लेकिन इलाज तो दूर चिकित्सक ने उसे देखना भी मुनासिब नहीं समझा। इलाज नहीं मिलने पर गर्भवती की हालत बिगड़ने लगी। करीब एक घंटा बाद चिकित्सकों ने गर्भवती को मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया।
उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा कमजोर है, जिसकी डिलीवरी कराने में खतरा हो सकता है। इसलिए गर्भवती को मेरठ मेडिकल के लिए रेफर किया गया है।