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Hapur News: 30 गांवों में फैला हेपेटाइटिस, सरकारी अस्पतालों में नहीं इलाज की सुविधा

Mon, 17 Jul 2023 10:26 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। जिले के 30 से अधिक गांवों में हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) फैल गया है, जिसकी चपेट में आकर हर साल 20 से अधिक मौत हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के किसी सरकारी अस्पताल में हेपेटाइटिस सी बीमारी का इलाज तक नहीं है। मेरठ में मरीजों को भटकाया जाता है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में उपचार बेहद महंगा है।
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दरअसल, इन गांवों के पास से काली नदी और छोइया नाला गुजर रहा है। इन नालों में कई जिलों की औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी बहाया जाता है। जिसने हापुड़ के भूगर्भ जल को दूषित कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग ध्यान ही नहीं देता। यही कारण है कि ब्लड बैंक भी इन क्षेत्रों में कैंप लगाना उचित नहीं समझते, क्योंकि 30 फीसदी से अधिक की रिपोर्ट पॉजिटिव ही आती हैं। फिजिशियन डॉ.प्रदीप मित्तल के अनुसार सामान्य पीलिया सामान्य दवाओं से ठीक हो जाता है, लेकिन हेपेटाइटिस बी और सी खतरनाक पीलिया होता है, जो लीवर पर अटैक करता है। यह एक शांत संक्रमण है। अधिकतर लोगों को इस संक्रमण के होने का पता ही नहीं चल पाता है। हेपेटाइटिस बी और सी लीवर कैंसर का कारण बनता है। ऐसे में जरूरी है कि कोई भी लक्षण नजर आने पर तुरंत अच्छे चिकित्सक से संपर्क करें।

फिजीशियन डॉ.गौरव मित्तल ने बताया कि हेपेटाइटिस लीवर से जुड़ी बीमारी है। इसके लक्षण अन्य बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं। इसीलिए सही जांच के बिना इसकी पहचान करना आसान नहीं होता है। यह संक्रमण पांच प्रकार के हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है। इसमें हेपेटाइटिस-ए, बी, सी, डी और ई (एचएवी, एचबीवी, एचसीवी, एचवीवी और एचईवी) शामिल हैं।
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इन गांवों में घातक हो रहा हेपेटाइटिस सी

गांव गोहरा आलमगीरपुर, हरनाथपुर कोटा, आगापुर, मुरादपुर, असरा, मतनौरा, छतनौरा, कनिया, औरंगाबाद, बिगास, श्यामपुर जट्ट, दयानतपुर, महमूदपुर, उपैड़ा, दयानतपुर, रसूलपुर, धनावली अट्टा, रसूलपुर।



गोहरा के 100 लोगों की जांच में 70 मिले थे संक्रमित

गोहरा के ग्रामीणों ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले गांव में एक कैंप लगा था। इसमें 100 लोगों की जांच की गई, जिसमें 70 से अधिक हेपेटाइटिस सी के रोगी मिले थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कैंप तक नहीं लगे।



आठ से दस हजार है एक दवा के डब्बे की कीमत

हेपेटाइटिस बी और सी की दवाएं सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलती हैं। जबकि बाजार में इन डब्बों की कीमत आठ से दस हजार रुपये है। इस लिहाज से मरीज की एक माह की दवाएं 10 से 15 हजार रुपये तक आती है।



हेपेटाइटिस फैलने के कारण

* हेपेटाइटिस ए दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलता है।

* हेपेटाइटिस बी संक्रामक रक्त या किसी दूसरे द्रव्य पदार्थों के संपर्क में आने पर फैल सकता है।

* हेपेटाइटिस सी यानी एचसीवी (हेपेटाइटिस -सी वायरस) के कारण होता है और संक्रमित खून या इस्तेमाल की हुई सुई के लगाने से होता है।

* हेपेटाइटिस डी, डी वायरस के कारण होता है। हेपेटाइटिस डी सिर्फ उनको होता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त होते हैं।

- हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस डी दोनों के साथ होने पर स्थिति काफी जटिल हो जाती है।

- हेपेटाइटिस ई फैलने का मुख्य कारण भी दूषित जल और भोजन होता है।




हेपेटाइटिस के लक्षण-

* बुखार तथा त्वचा और आंखों में पीलापन होना।

* पेशाब का पीला आना और थकान रहना।

* भूख नहीं लगना तथा जी कच्चा रहना और उल्टी आना।

* वजन कम होना और पेट में दर्द होना।

* जोड़ो में दर्द और डायरिया होना।

* फ्लू वाले लक्षण आना।




हेपेटाइटिस से बचाव-

* भोजन करने से पहले हाथों को अच्छे से धुलें।

* दूषित पानी और दूषित भोजन करने से बचें।

* हेपेटाइटिस बी का टीका जरूर लगवाएं।

* इस्तेमाल की गई सुई से इंजेक्शन न लगवाएं।

* असुरक्षित यौन संबंध से बचना चाहिए।

* नाई और एक ही ब्लेड से शेव नहीं करानी चाहिए।



हेपेटाइटिस सी बढ़ने के कारक

प्रभावित गांवों के पास से होकर छोइया, काली नदी गुजर रही है। इन नालों में विभिन्न जिलों की औद्योगिक इकाइयों का दूषित कचरा बहाया जा रहा है, जिसका दंश हापुड़ के लोग झेल रहे हैं।



-छोईया, काली नदी का प्रदूषित जल लील रहा जिंदगी

क्षेत्र में बढ़ता हेपेटाइटिस सी लोगों की मौत का कारण बन रहा है। नमामि गंगे परियोजना में छोइया और काली नदी को सम्मलित कराया गया, फिर भी सुधार नहीं हुआ। गरीब ग्रामीण अपनी जमीन बेचकर इलाज करा रहे हैं। गांवों में हर साल 30 से अधिक मौत हो रही हैं।कृष्णकांत हूण, पर्यावरविद्।फोटो संख्या



-गांव में गंभीर स्तर पर है हेपेटाइटिस-सी

गोहरा में हेपेटाइटिस सी गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, अधिकांश ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच, कैंप की व्यवस्था तक नहीं कराई जा रही है। काली नदी के प्रदूषित पानी के कारण ही गांव बीमारियों की चपेट में आया है।संचित त्यागी, पूर्व ग्राम प्रधान।

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गांवों में लगवाए जाएंगे कैंप

प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाएगा। उपचार की सुविधा मिलेगी, मरीजों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ
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