फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जनता लाचार कैश के लिए बैंकों में नहीं टूट रही कतार

Thu, 17 Nov 2016 08:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
विज्ञापन
बैंकों में नहीं टूट रही कतार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
500-1000 के पुराने नोट बदलने के लिए बैंकों में उमड़ रही भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। बृहस्पतिवार को भी दो घंटे में ही जिले के अधिकांश बैंकों में कैश खत्म हो गया तो कुछ बैंकों में नगदी पहुंच ही नही पाई।
विज्ञापन


शादी का मौसम होने के चलते भी बैंक में नोट बदलने के लिए भीड़ कम नहीं हो रही है। हालांकि, बुलंदशहर रोड स्थित सिंडिकेट बैंक की मुख्य शाखा में शाम तक ग्राहकों के नोट बदले गए और नगदी जमा करने की सुविधा मिली, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

एक सप्ताह से बैंक कैश की कमी से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि कई बैंकों में सुबह के समय कैश नहीं रहता। ऐसे में ग्राहकों को दूसरे बैंकों के बाहर कतार में लगना पड़ रहा है।
विज्ञापन

रेलवे रोड के करीब चार बैंकों में दो घंटे के अंदर ही कैश खत्म हो गया।

इसके चलते सैकड़ों ग्राहकों को दूसरे बैंकों में फिर से कतार में खड़ा होना पड़ा। ऐसे में ग्राहक शाम तक वह अपने नंबर का इंतजार करते रहे। उधर, ग्राहकों की भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

बैंकों के अंदर व बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, एटीएम सुविधा बृहस्पतिवार को भी पूरी तरह सुचारु नहीं हो पाई। अधिकांश एटीएम के शटर बंद रहे। एलडीएम एपी चतुर्वेदी ने बताया कि सभी बैंकों में कैश पहुंचाया जा रहा है। लेकिन ग्राहकों की भीड़ के चलते समस्या खत्म नहीं हो रही है। जल्द ही व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।

वोट की तरह नोट के लिए अंगुली पर निशान का असर बैंकों की कतार में लगे लोगों पर दिखने लगा है। हालांकि, सुबह से लगने वाली भीड़ को लेकर अभी भी बैंकों के बाहर व्यवस्था बनाने में पसीना छूट रहा है। लेकिन बृहस्पतिवार को दोपहर बाद भीड़ से कुछ राहत देखने को मिली।

नोटबंदी के बाद बैंकों में भीड़ बेकाबू होने लगी थी। इसके बाद सरकार ने एक बार रुपये एक्सचेंज करने के बाद उंगली में स्याही लगाने का फैसला लिया। सरकार के इस आदेश का बृहस्पतिवार को असर दिखा।

इस नई व्यवस्था से सुबह के समय बैंकों के बाहर भीड़ तो रहती है लेकिन दोपहर होते ही ग्राहकों की संख्या में कमी होने लगती है। बैंकों पर कम होती लाइन को देखकर अफसर भी राहत की सांस लेने लगे हैं।

नोट बंदी से रजिस्ट्री विभाग में सन्नाटा है। आलम यह है कि जिले में एक सप्ताह में 90 प्रतिशत स्टांप बिक्री में कमी आई है। रियल स्टेट भी औंधे मुंह गिरा है। प्रॉपर्टी डीलरों की दुकानें बंद हो गई है।

आठ नवंबर से नोट बंदी की घोषणा के बाद अभी तक महज 6 बैनामे हुए हैं। इसके चलते रजिस्ट्री विभाग को हर रोज पांच लाख रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। स्टांप की बिक्री की बात की जाए तो नोट बंदी से नब्बे प्रतिशत बिक्री बाधित हुई है।

हालांकि शासन ने पुराने नोटों पर रजिस्ट्री शुल्क जमा करने के आदेश देकर लोगों को राहत दिलाने का प्रयास किया है।

बड़े नोट बंदी को लेकर रियल स्टेट पर भी बुरा असर पड़ा है। प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त पूरी तरह बंद है। प्रापर्टी डीलर अपने कार्यालय बंद करे घरों में बैठे हैं।

जिला मुख्य कोषाधिकार अधिकारी प्रत्यूष कुमार का कहना है कि हजार और पांच सौ का नोट बंद होने के बाद स्टांप बिक्री में 90 प्रतिशत की कमी आई है।

500-1000 रुपये के नोटों पर रोक के बाद से शहर में मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। शहर में चर्चा है कि बैंकों के बाहर दिहाड़ी पर मजदूर नोट बदलने के लिए कतार में लग रहे हैं।
नगर के अतरपुरा चौराहे पर भारी संख्या में मजदूर मिलते थे।

भवन निर्माण व अन्य कार्यों के लिए लोग यहीं से मजदूरों को अपने साथ ले जाया करते थे। लेकिन नोटबंदी के आदेश के बाद अब यहां ढूंढे से भी मजदूर हाथ नहीं आ रहे हैं। वहीं शहर में चर्चा है कि मजदूर इन दिनों बैंकों की कतार में लगकर दहाड़ी पर कार्य कर रहे हैं।

बुलंदशहर रोड स्थित प्रधान डाकघर में अव्यवस्थाओं से ग्राहक परेशान हैं। डाकघर की एटीएम सुविधा ठप पड़ी हैं। ग्राहक जान जोखिम में डालकर ट्रांसफार्मर के पास कतार में खड़े रहते हैं। डाकघर परिसर में काफी जगह होने के बावजूद ग्राहकों को अंदर खड़ा नहीं होने दिया जा रहा है।

बुलंदशहर रोड स्थित प्रधान डाकघर में करेंसी एक्सचेंज के लिए ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। डाकघर के अंदर जगह होने के बावजूद ग्राहकों की कतार सड़क किनारे लगाई जा रही है। इससे यातायात तो प्रभावित हो ही रहा है।

डाकघर के बाहर लगा ट्रांसफार्मर भी ग्राहकों के लिए खतरा साबित हो रहा है। हालांकि, ट्रांसफार्मर के चारों ओर गार्डिंग लगी है, लेकिन धक्कामुक्की के चलते कई बार ग्राहक ट्रांसफार्मर के पास तक भी पहुंच जा रहे हैं। डाकघर में लगा एटीएम शोपीस बनकर रह गया है।

पोस्ट मास्टर एसएन गुप्ता का कहना है कि ग्राहकों की अधिक भीड़ के चलते डाकघर के बाहर कतार लगवानी पड़ रही है। ग्राहकों को परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

बड़े नोटों के बंद होने से वादकारियों की परेशानी को देखते हुए वकीलों ने अगले दो दिन तक फ्री में मुकदमों की पैरवी और दायरे का काम करने का फैसला लेकर नजीर पेश की है।
अदालतों में वकील भी बड़े नोटों के बंद होने से परेशान हैं।

फीस मांगने पर वादकारी उन्हें बड़े नोट थमाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे हो रही परेशानी को देख बृहस्पतिवार दोपहर में बार अध्यक्ष सुबोध त्यागी और सचिन शांतनु तोमर ने जनरल बॉडी की आपात मीटिंग की।

इसमें बार एसोसिएशन कार्यकारणी ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि शुक्रवार और शनिवार को वकील फ्री में मुकदमों की पैरवी करेंगे। साथ ही अपने दायरे में आने वाले काम फ्री में करेंगे। पूर्व अध्यक्ष बलराज त्यागी, रविंद्र चौधरी, चंद्रशेखर शर्मा, प्रमोद राणा,

जितेंद्र भाटी, अरुण अग्रवाल, राजकुमार चौहान, देवेंद्र कुमार, शरीफ अली, राजेंद्र चौहान, युद्धवीर सिंह, कृपाल चौहान, रामरतन सिंह समेत सभी वकील बार कार्यकारणी के इस फैसले को जमकर सराह रहे हैं।

शहर के बैंकों में 500 और 1000 का नोट बदलने के लिए बृहस्पतिवार सुबह ग्राहकों की भीड़ उमड़ गई। बैंकों में कोई अप्रिय घटना नहीं हो इसके लिए पुलिसबल तैनात किया गया था।
 
भारतीय  स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक सुशील कुमार ने बताया कि बैंकों में रुपये जमा  करने की पूरी व्यवस्था की गई थी। रुपये पैसे जमा कर  वापस देने के लिए  अतिरिक्त काउंटर खोले गए थे। कोतवाल अजय अग्रवाल ने बताया कि  बैंकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बैँकों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात किये  गए हैं।

नोट बंदी के बाद बैंकों के बाहर लगी लंबी कतार को व्यवस्थित करने में जहां पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। वहीं, पुलिस अधिकारियों के समक्ष नई करेंसी की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है। पुलिसकर्मियों की कमी के कारण नई करेंसी की सुरक्षा व्यवस्था रामभरोसे चल रही है।

जिले के बैंकों पर पुलिस मुस्तैद है। 90 प्रतिशत जवान बैंकों में लाइन लगवा रहे हैं। नई करेंसी भी बैंकों में पहुंचनी शुरू हो गई है। ऐसे में स्थानीय पुलिस को इस बात की चिंता सता रही है कि बैंकों में आ रही मोटी धनराशि पुलिसकर्मियों की कमी की भेंट न चढ़ जाए।

पुलिस सुबह से बैंकों में अपनी ड्यूटी में व्यस्त हो जाती है। ऐसे में हाईवे पर कैश लेकर आने वाले वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुश्किल हो रही है। पुराने नोट बंद होने के बाद बदमाशों की भी नई करेंसी पर नजर है। सूत्रों की माने तो अधिकारी इस बात को लेकर खासे चिंतित हैं।

एसपी अलंकृता सिंह का कहना है कि बैंकों में ड्यूटी के कारण पुलिसकर्मियों की कमी जरूर है। लेकिन ऐसे गंभीर मामलों के लिए पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। इसमें विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

नोटबंदी से बेपटरी हुई बैंकिंग ढर्रे पर नहीं लौट पा रही है। बृहस्पतिवार को गढ़ में टिन की प्याऊ के पास बैंक शाखा पर भीड़ ने कैश खत्म होने पर जमकर हंगामा किया। कतार में खड़े पीड़ित सोनू, ओमवीर, रिंकू, विकास, शिवकुमार,

शादाब, नौशाद, मतलूब, मुकेश, अनीसा, राधा, शाहीन, कमला, बाबू, चमन ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मी नोट बदलने और पैसा जमा करने में खुली मनमानी चला रहे हैं। जिससे ब्याह-शादी के लिए खरीदारी करना तो दूर बल्कि बीमारी में दवा तक खरीद पाना मुश्किल हो रहा है।

वहीं, ब्रजघाट शाखा में नोट बदलने के नाम पर हेराफेरी होने से गुस्साए लोगों ने हंगामा किया। सिंडिकेट बैंक शाखा ब्रजघाट में नोट बदलने और पैसा जमा करने को लाइन में खड़े लोगों ने हंगामा कर दिया।

सीमा, बबीता, मिथलेश, अंसार, कमल का आरोप है कि खाते में पैसा जमा करने वालों के हजार और पांच सौ के नोटों को नकली बताकर बैंक कर्मी अपने पास रख लेते हैं। मांगने पर नोट नहीं देते हैं और न ही उन पर क्रॉस वाली लाइन खींचते हैं।

कई बार कोशिश करने के बाद भी शाखा प्रबंधक अजहर अख्तर ने मोबाइल रिसीव नहीं किया। एसडीएम आरएन पांडेय का कहना है कि इस संबंध में जांच कराई जाएगी।

सिंभावली की बैंक शाखाओं पर लाइन में लगे महिला-पुरुषों को सपा प्रदेशीय सचिव सतपाल यादव और पूर्व प्रमुख कुंवरपाल सिंह ने चाय, पानी और बिस्कुट के पैकेटों का वितरण किया।

वहीं, बहादुरगढ़ में आरएसएस से जुड़े देवव्रत चौहान, आकाश, विनय आर्य, सुशील मोदी, उत्तम सिंह, संजीू वर्मा, भूदेव, दीपांशु, शिवम, कुलदीप चौहान ने पानी, चाय और बिस्कुट वितरित किए।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें