सरकारी अस्पतालों में भले ही स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी खल रही हो, लेकिन विभाग में ऐसे विशेषज्ञ आधा दर्जन चिकित्सक आला अधिकारी बने बैठे हैं। शासन ने एडी स्वास्थ्य से तमाम स्पेशलिस्टों की सूची मांगी है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा दिया है।
शासन की मंशा विशेषज्ञ चिकित्सकों को अस्पतालों में तैनात करने की है। ऐसे में कई आला अधिकारियों को अब कुर्सी जाने का खतरा सताने लगा है। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं राम भरोसे चल रही हैं।
स्पेशलिस्ट चिकित्सक अस्पतालों में न बैठकर विभाग के उच्च प्रशासनिक पदों की शोभा बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रहीं हैं।
मामले की गंभीरता पर अब शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। एडी स्वास्थ्य के माध्यम से शासन ने जिले में तैनात स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की सूची मांग ली है। सूची के आधार पर अस्पतालों में रिक्त पदों को भरा जायेगा।
सूत्रों की मानें तो विशेषज्ञ चिकित्सकों के उच्च पदों पर तैनात अफसरों को अब पद छोड़कर अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा देनी होगी। बता दें कि करीब आधा दर्जन स्पेशलिस्ट चिकित्सक जिले में उच्च पदों पर तैनात हैं।
ये केवल कागजों की उलट पलट में लगे रहते हैं। मरीजों के इलाज की इन्हें तनिक भी चिंता नहीं है। शासन की रिपोर्ट के बाद से सभी अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। कुछ ने तो ऊपर जुगाड़ लगाना भी शुरू कर दिया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके सिंह का कहना है कि शासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी। सूची प्रेषित कर दी गई है। फिलहाल कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जिले में 17 स्पेशलिस्ट तैनात है, जबकि आवश्यकता करीब 29 स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की है।