सांप के डसने पर ग्रामीणों को इलाज के लिए सीएचसी तक की दौड़ लगानी पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि गांवों में बने किसी भी उप स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी स्नैक वेनम मौजूद ही नहीं है।
बरसात का मौसम शुरू होते ही सर्प दंश की घटनाएं बढ़ जाती है।
सर्प दंश का सबसे ज्यादा खतरा खेतों में काम करने वाले किसानों को होता है। जागरूकता के अभाव में देहात में सर्प दंश की घटना होने पर परिजन मरीज का झाड़ फूंक कराने में लग जाते हैं। ऐसे में मरीज को इलाज मिलने में काफी देरी हो जाती है, इससे मौत तक हो जाती है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रवीण शर्मा का कहना है कि सांप काटने पर मरीज में दो प्रकार के लक्षण नजर आते हैं। एक न्यूरो टॉक्सिस और दूसरा कार्डियक टॉक्सिस। कार्डियक टॉक्सिस होने पर मरीजों में हृदयाघात होने की संभावना बढ़ जाती है। मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
न्यूरो टॉक्सिस के मरीजों में समय से इलाज मिलने पर नर्वस सिस्टम खराब होने लगता है। दिमाग कार्य करना बंद कर देता है। मरीज की हालत खराब होने पर नाक और कान से खून तक आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि सभी सांप जहरीले नहीं होते इसलिए मरीज को घबराना नहीं चाहिए।