मानकों के विपरीत चल रहा सीईटीपी प्लांट एचपीडीए ने किया बंद
पिलखुवा। फैक्टरियों से निकलने वाले दूषित पानी को सोधन करने वाले जलशोधन संयंत्र (सीईटीपी) को एचपीडीए ने बृहस्पतिवार को बंद करा दिया। मानक के विपरीत चलने पर प्लांट को बंद कराने के लिए नेशनल क्लीन गंगा मिशन ने आदेश दिए थे। प्राधिकरण के अधिकारी जब प्लांट बंद कराने पहुंचे तो फैक्टरी संचालकों से जमकर नोकझोंक हुई। प्लांट के बंद होने से सैकड़ों फैक्टरियां भी बंद हो गई हैं। इनमें काम करने वाले हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी पर संकट उत्पन्न हो गया है।
वर्ष 2000 में हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा गांव डूहरी के पास पिलखुवा में टेक्सटाइल सिटी की स्थापना की थी। इसमें सैकड़ों फैक्टरियां संचालित हैं। यहां हैंडलूम का सबसे ज्यादा काम होता है, ऐसे में इन फैक्टरियों से केमिलकल युक्त पानी निकलता है।
इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए जलशोधन संयंत्र प्लांट लगाया गया था, जिसका संचालन हापुड़-पिलखुवा विकास प्रधिकरण द्वारा किया जा रहा था। लेकिन काफी समय से यह मानकों के विपरीत चल रहा था। एचपीडीए के सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि नेशनल क्लीन गंगा मिशन द्वारा प्राधिक रण को प्लांट के संबंध में 15 बिंदुओं का नोटिस भेजा था। जिसमें बताया गया था कि जलशोधन प्लांट मानकों के अनुसार नहीं चल रहा है। फैक्टरियों से जो पानी निकल रहा है वो मानक पूर्ण नहीं है। इसे तुरंत बंद कराया जाए। उन्होंने बताया कि फैक्टरी स्वामियों को नोटिस भेजकर बृहस्पतिवार को प्लांट को बंद करा दिया गया। हालांकि इस दौरान फैक्टरी संचालकों की प्राधिकरण की टीम से काफी नोकझोंक हुई। वहीं उद्यमियों की एसोसिएशन, टेक्सटाइल सेंटर व्यापारी संघ द्वारा प्रमुख सचिव लखनऊ हस्तकरघा उद्योग रमा रमण को फोन करके प्लांट के बंद होने की जानकारी दी गई। इस संबंध में एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक को पत्र भी लिखा गया है। जानकारी के अनुसार मंडलायुक्त ने भी एचपीडीए वीसी से जवाब मांगा है।
उद्यमियों को करना था संस्था का गठन
एचपीडीए के सचिव ने बताया कि प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी उद्यमियों द्वारा गठित संस्था को दी जानी थी। पूर्व में हुई उद्योग बंधुओं की बैठक में इस संबंध में जानकारी भी दी गई थी। तथा उद्यमियों को संस्था का गठन करना के लिए कहा गया था। उद्यमियों द्वारा एसपीवी नाम से संस्था का गठन तो कर दिया गया लेकिन प्लांट का हैंडओवर नहीं लिया गया।
पिलखुवा एसोसिएशन, टेक्सटाइल सेंटर व्यापारी संघ के संरक्षक विकास शर्मा का कहना है कि प्लांट का संचालन प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है, इसमें जो भी खामियां या अनियमितताएं पाई गई है इसका जिम्मेदार प्राधिकरण हैं। बेवजह व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाएं। इस संबंध में व्यापारियों का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्र सरकार के महानिदेशक से मिलेगा।
निरीक्षण के दौरान मिली थी कमियां
पिलखुवा एसोसिएशन, टेक्सटाइल सेंटर व्यापारी संघ के अध्यक्ष आरएस चौहान का कहना है कि एनजीटी द्वारा 21 सितंबर 2020 और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा 16 दिसंबर 2020 को निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण में प्लांट में 15 कमियां निकाली गईं थीं। जिनमें से 14 कमियां एचपीडीए द्वारा खत्म की जानी थीं। लेकिन एचपीडीए द्वारा इसकी अनदेखी की गई है। जिसका खामियाजा उद्यमियों और श्रमिकों को झेलना पड़ रहा है। इस संबंध में एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक को पत्र भी लिखा गया है।
कोट -
एचपीडीए उपाध्यक्ष अर्चना वर्मा का कहना है कि भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा के आदेश पर सीईटीपी को बंद कर दिया गया है। पूर्व में सीपीसीबी द्वारा कहा गया था कि इसे स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीबी) द्वारा चलाया जाए, लेकिन एसपीवी द्वारा हैंडओवर नहीं लिया गया। जिस कारण प्राधिकरण इसे चला रहा था।