नगर पालिका पिलखुवा को चला रहा एक लिपिक
पिलखुवा। नगर पालिका पिलखुवा को एक लिपिक चला रहा है। पालिका में पिछले 25 वर्षों से तैनात उक्त लिपिक का सभी कामों में हस्तक्षेप रहता है। एंटी करप्शन टीम द्वारा सोमवार को रिश्वत लेते पालिका के कर्मचारी को गिरफ्तार करने के बाद मामले की छानबीन में उक्त लिपिक का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि कर्मचारी को उक्त लिपिक ने ही ठेकेदार से रुपये लेने भेजा था। इस दौरान एक जेई भी वहां मौजूद था। टीम की कार्रवाई के दौरान लिपिक और जेई वहां से रफूचक्कर हो गए।
सूत्रों की मानें तो उक्त लिपिक पर पालिका के सभी कामों की जिम्मेदारी है। इसमें कर्मचारियों के पेमेंट से लेकर, ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान, टेंडर आदि सभी कुछ उक्त लिपिक ही देखता है। जानकारों की मानें तो लिपिक की पहले भी ठेकेदारों व कर्मचारियों ने कई बार शिकायत की है, लेकिन उसपर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती। अब एंटी करप्शन टीम की ओर से भी उसकी जानकारी जुटाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उक्त लिपिक करोड़पति है। बिना उसकी सहमति के पालिका में किसी का काम नहीं होता है।
बिना चढ़ावा पालिका में नहीं होता कोई काम
- ठेकेदार मंदीप शर्मा ने बताया कि पालिका में सीक्योर्टी (एफडीआरओ) में रूप में लागत का जो 10 प्रतिशत रुपया जमा होता है उसकी 5 प्रतिशत रकम छह माह के अंदर वापस ठेकेदार को देनी होती है। जो पिछले दो साल से अभी तक नहीं दी गई है। बताया कि पालिका द्वारा जीएसटी का भी एक रुपया नहीं दिया गया है। 35 से 40 लाख रुपये नगर पालिका पर हैं। ठेकेदार का आरोप है कि पालिका के बाबू बगैर कमीशन लिए कोई भी बिल पास नहीं करते हैं।
पालिका में 32 ठेकेदार रजिस्टर्ड
- नगर पालिका पिलखुवा में अभी 32 ठेकेदार रजिस्टर्ड हैं। वहीं उक्त लिपिक व कमीशनबाजी के चलते सभी परेशान हैं। अब एक कर्मचारी के रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद से पालिका कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है।