अटकी रही सांसें, आस और उम्मीद के बीच दुआ करते रहे परिजन
हापुड़। बोरवेल में गिरा बच्चा मुआविया दो भाइयों में सबसे बड़ा है। छोटा भाई शुबान तीन साल का है। जैसे ही परिजनों को पता चला कि मुआविया बोरवेल में गिर गया है, तो परिजनों के होश उड़ गए। पिता उस समय गजरौला काम करने गया था। जबकि मां समरीन और दादी का रो रोकर बुरा हाल था। दोनों पूरी घटना के दौरान बच्चे के सकुशल बाहर निकाले जाने की दुआ करती रहीं।
दादा कदीर शुरूआत से मौके पर मौजूद थे। वे बढ़ई का काम करते हैं और पास ही एक वर्कशॉप पर काम कर रहे थे, इसलिए सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने उनसे बच्चे को आवाज देकर शांत रहने के लिए बोला तो वे फूट फूटकर रोने लगे। उन्होंने बच्चे के मूकबधिर होने पर उसके द्वारा न सुनने की लाचारी जाहिर की तो सभी की आंखें भर आई। करीब तीन घंटे बाद मोहसिन गजरौला से बदहवास हालत में पहुंचा तो आंसू न रोक सका। घर पर पूरे समय मातम पसरा रहा। मां और दादी पूरे समय अल्लाह से दुआ करती रही। मोहल्ले के लोग भी बच्चे के सकुशल वापसी की दुआ करते नजर आए।
छतों पर जमा भीड़ से था दूसरे हादसे का खतरा
हादसे की जानकारी होते ही घटना स्थल के आसपास के मकानों पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ मकान जर्जर हालत में थे, ऐसे में पुलिस प्रशासन को किसी अन्य हादसे के न हो जाने का खतरा सताने लगा। जिसे देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने आसपास की छतों पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। ताकि छतों पर भीड़ को एकत्र होने से रोका जा सके।
फूलगढ़ी स्थित मुआविया के घर पर उसकी सलामती की दुआ करती मां व दादी। शोभित त्यागी- फोटो : HAPUR
फूलगढ़ी स्थित बोरवेल में बच्चे के गिरने के बाद ऑक्सीजन का सिलेंडर ले जाते लोग। संवाद- फोटो : HAPUR
फूलगढ़ी में वोरवेल में गिरे अपने पोते की सलामती के लिए हाथ जोड़कर खड़ा दादा। संवाद- फोटो : HAPUR