खेलते हुए 54 फुट गहरे बोरवेल में गिरा मासूम, 5.40 घंटे बाद निकाला
हापुड़। देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहल्ला फूलगढ़ी में खेलते हुए चार वर्षीय मूकबधिर मासूम मुआविया पुत्र मोहसिन खेलते समय अचानक 54 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया। नगर पालिका का नलकूप पिछले करीब चार वर्ष से बंद होने के बाद खंडहर में तब्दील था। सूचना मिलते ही पूरा प्रशासनिक अमला बच्चे को निकालने के प्रयास में जुट गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम ने 5.40 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया और अस्पताल भेज दिया। फिलहाल बच्चे को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
मोहल्ला फूलगढ़ी निवासी मोहसिन घरों में पत्थर लगाने का काम करता है। उसने बताया कि मंगलवार दोपहर करीब 11 बजे उसका बड़ा पुत्र मुआविया घर से खेलने के लिए निकला था। करीब 11.55 बजे कुछ बच्चों ने पास में ही आग ताप रहे लोगों को सूचना दी कि नगर पालिका के बंद पड़े नलकूप के बोरवेल से किसी बच्चे के रोने की आवाज आ रही है। लोगों ने मुआविया को खंडहर की ओर जाते देखा था, ऐसे में परिजनों और पुलिस को मामले की सूचना दी गई।
बच्चे के बोरवेल में गिरने की खबर से अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। आनन फानन में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। कुछ ही देर में डीएम मेधा रूपम, एसपी दीपक भूकर के अलावा नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंच गई। करीब तीन घंटे बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और 5.40 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने लोहे के रिंग को सरियों के माध्यम से बोरवेल में डालकर बच्चे को बाहर निकाल लिया। डीएम मेधा रूपम ने बताया कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। फिलहाल उसे कुछ समय के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
पता चलते ही शुरू हो गए बच्चे को निकालने के प्रयास
स्थानीय प्रशासन की टीम करीब 12 बजे मौके पर पहुंच गई। इससे पहले ही मोहल्ले के लोगों द्वारा उसे निकालने के प्रयास शुरू हो गए। मौके पर मौजूद बच्चे के दादा कदीर बच्चे की हालत देखकर गुमसुम हो गए। स्थानीय लोगों के साथ पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम ने बच्चे को निकालने के प्रयास शुरू किए। समस्या यह था कि बच्चा मूक बधिर होने के कारण कुछ सुन नहीं पा रहा था। सबसे पहले बोरवेल में ऑक्सीजन की पाइप डालकर सप्लाई शुरू कर दी गई। बोरवेल में प्रकाश की व्यवस्था करते हुए उसे रस्सी के माध्यम से निकालने के प्रयास किए गए। फंदा बनाकर बच्चे के हाथ में फांसने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बोरवेल के अंदर एक सीसीटीवी कैमरा भेजकर उसकी स्थिति पता लगाने का प्रयास किया गया। इसके बाद मौके पर गाजियाबाद से आई एनडीआरएफ की आठवीं बटालियन ने लोहे के रिंग (छल्ले) को सरियों के माध्यम से नीचे पहुंचाया। इसके अलावा अंब्रेला टूल, रोप रिंग जैसे टूल का प्रयोग कर बच्चे को कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। इस दौरान एनडीआरएफ की टीम में 40 जवान शामिल थे।
स्थानीय लोगों ने दिखाया जज्बा
करीब 54 फुट गहाई में 14 इंज चौड़े बोरवेल से बच्चे को सकुशल निकालना किसी के लिए भी काफी मुश्किल नजर आ रहा था। लेकिन बचाव में लगी टीमों और स्थानीय लोगों के जज्बे के साथ यह संभव हो पाया। बच्चे के गिरने का पता चलते ही स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थानीय पुलिस प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, फायर ब्रिगेड की टीम द्वारा सबसे पहले प्रयास शुरू किए गए। अधिकारी जिस सामान की मांग करते वह उन्हें मिनटों में मुहैया हो जाता। पास के घर से बिजली सप्लाई, सीसीटीवी कैमरा, एलईडी, रस्सी और दूसरे उपकरण मिनटों में जमा हो गए। बच्चे को निकालने में देर न हो, इसे देखते हुए रात में लाइट की व्यवस्था करने समेत सभी कार्य लोगों द्वारा पूरे कर दिए गए थे।
जेसीबी का भी किया प्रयोग, पर नहीं बनी बात
जिस स्थान पर नलकूप था, वहां रास्ता काफी संकरा था। पीछे के रास्ते से एक दीवार को गिराकर जेसीबी को अंदर लाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अधिकारियों को लग रहा था कि जेसीबी के माध्यम से खुदाई की आवश्यकता पड़ सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बिना इसके ही बच्चे को बाहर निकाल लिया गया।
बोरवैल में गिरे बच्चे को निकालने के बाद अस्पताल में हाल जानने पहुंची डीएम। संवाद- फोटो : HAPUR
मोहल्ला शिवगढ़ी में स्थित नगर पालिका के बोरवैल में गिरे बच्चे को निकालकर अस्पताल ले जाते स्वास्?- फोटो : HAPUR
मोहल्ला शिवगढ़ी में स्थित नगर पालिका के बोरवैल में गिरे बच्चे को निकालकर अस्पताल में उपचार देते ?- फोटो : HAPUR
हापुड़। नगर पालिका के बोरवेल में गिरे बच्चे को निकालकर अस्पताल ले जाते स्वास्थ्यकर्मी। संवाद- फोटो : HAPUR