भ्रूण लिंग जांच के खुलासे में हापुड़ फेल
हापुड़। जिले में स्वास्थ्य विभाग पांच सालों में कोई मुखबिर नहीं तलाश पाया है, अल्ट्रासाउंड सेंटरों का कोई स्टिंग भी नहीं हुआ। जबकि हरियाणा की टीम दो महीने में ही तीन स्टिंग कर, भ्रूण जांच के खेल का पर्दाफाश कर चुकी है। इसमें दो स्थानों से स्थानीय अधिकारी मशीन तक जब्त नहीं कर पाए हैं। अब पंजीकृत सेंटर पर भी खेल पकड़े जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
भ्रूण जांच पर पूरी तरह प्रतिबंध है, यह संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। करीब पांच साल पहले एक मुखबिर योजना शुरू की गई थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मुखबिर तलाशने थे, जो गर्भ जांच की जानकारी उन तक पहुंचा सके। लेकिन विभाग एक भी मुखबिर नहीं तलाश पाया, या यूं कहें की स्वास्थ्य विभाग ने इस पर काम ही नहीं किया।
अफसरों के संरक्षण या लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हरियाणा की टीम हापुड़ में आकर तीन बड़े स्टिंग ऑपरेशन कर चुकी है। स्थानीय अधिकारियों को पता ही तब चलता है जब जांच केंद्र के धर पकड़ की पूरी प्लानिंग कर ली जाती है। जिले के अंदर कई सेंटर ऐसे हैं जो उस दिन बंद करा दिए जाते हैं, जिस दिन प्रशासनिक तौर पर निरीक्षण होना होता है। इसके अलावा कई केंद्र ऐसे हैं जहां आसपास एक या दो ही एमबीबीएस चिकित्सकों के क्लीनिक हैं लेकिन गांवों में अल्ट्रासाउंड सेंटरों को मान्यता दे दी गई है।
मोबाइल वैन को पकड़ने के लिए आज तक अभियान नहीं चलाया गया। चोरी छिपे इन वैन से क्षेत्र में भ्रूण जांच का खेल किया जा रहा है। दो महीने पहले ही धौलाना क्षेत्र में पकड़े गए अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण हुआ था। लेकिन इसमें भ्रूण जांच का खेल पकड़े जाने से अफसर भी परेशान हैं, क्योंकि यह ऑपरेशन भी हरियाणा की टीम ने ही पूरा किया है, स्थानीय अफसरों को इसकी भनक तक नहीं थी।
केस नंबर एक-
10 नवंबर को हरियाणा की टीम ने हापुड़ जिले की सीमा से ही चार महिला व दो दलालों को पकड़ा था। लिंग परीक्षण का खेल तो गुलावठी में चल रहा था। लेकिन उसकी पूरी पटकथा हापुड़ में ही लिखी जा रही थी। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। जबकि हरियाणा से आयी टीम ने कुछ ही घंटों में पूरा स्टिंग कर डाला।
केस नंबर दो-
30 जून को धौलाना में हरियाणा की टीम ने भ्रूण जांच का पर्दाफाश किया था। सूचना दिए जाने पर स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। लेकिन वह मशीन तक जब्त नहीं कर पाए। इस क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भी लिंग परीक्षण के इनपुट मिले थे, लेकिन अफसरों की नाकामी यहां भी देखने को मिली।
केस नंबर तीन--
29 नवंबर को धौलाना में फिर से हरियाणा की टीम ने स्टिंग किया। इस बार स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ही लिंग परीक्षण का खेल पकड़ा। यहां भी हरियाणा टीम की ही पूरी प्लानिंग थी, बाद में स्थानीय अफसर खुद को हीरो साबित करने में जुटे रहे।
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केस नंबर चार---
गढ़ क्षेत्र में सीएमओ ने निरीक्षण के दौरान एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कराया था। लेकिन वह कुछ ही दिनों में चालू हो गया। जबकि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सेंटर चालू कराने के लिए डीएम की अध्यक्षता में बैठक होती है। जिसमें निर्णय होने पर ही सील खुलती है।
अल्ट्रासाउंड सेंटरों की होगी नियमित जांच
अल्ट्रासाउंड सेंटरों ी नियमित जांच के आदेश दिए गए हैं। पीसीपीएनडीटी अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। जिले की सीमा में लिंग परीक्षण का खेल नहीं चलने दिया जाएगा। - डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।