हवा की रफ्तार थमी, 24 घंटे में 254 पहुंचा एक्यूआई
हापुड़। हवा का प्रवाह थमते ही वातावरण में प्रदूषण का स्तर 100 अंक तक उछल गया है, बुधवार को एक्यूआई 254 पहुंच गया। इससे आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या बन गई। आतिशबाजी का खतरनाक धुआं अब असर दिखाने लगा है। सांस, हृदय रोगियों के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशुओं की सेहत के लिए भी यह वातावरण नुकसान दायक है। हवा की रफ्तार घटते ही एक्यूआई का स्तर आगामी एक सप्ताह के अंदर बढ़ने की आशंका है।
दिवाली के बाद हर साल जिले की हवा का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। सोमवार को दिवाली में खूब आतिशबाजी छोड़ी गई, पाबंदी के बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे जलाए गए। गंधक, पोटाश के मिश्रण से भी आतिशबाजी हुई, रातभर तेज हवा चलने के कारण प्रदूषण का स्तर वातावरण में नहीं बढ़ा। बुधवार सुबह हवा का वेग कम हुआ तो प्रदूषण ने जिले को जकड़ लिया।
प्रदूषण आंकने वाले मापक (एक्यूआई) का सूचकांक 254 दर्ज किया गया। प्रदूषण विभाग के अनुसार एक्यूआई का यह स्तर प्रदूषण की गंभीर (लाल) श्रेणी में आता है, यह हवा सामान्य और स्वस्थ मनुष्यों के लिए भी बेहद खतरनाक है। सांस और हृदय रोगियों के लिए तो इस हवा में सांस लेना भी अच्छा नहीं है।
इस साल जिले में पटाखों की बिक्री पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया गया था। ग्रैप की भी काफी सख्ती रही, इसके बावजूद प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
दो दिन प्रदूषण के स्तर में आया था सुधार
प्रदूषण को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा प्रयास किए गए थे। तेज हवा ने भी साथ दिया, जिसके बाद प्रदूषण का स्तर गिरकर 154 तक पहुंच गया था। लेकिन, बुधवार को जिले का एक्यूआई स्तर 254 पहुंच गया है। हवा का प्रवाह कम रहा तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाएगा।
प्रदूषण संबंधी अंतरराष्ट्रीय मानक और प्रभाव-
- पीएम 2.5 एयर क्वालिटी इंडेक्ट-
* 0-60-उत्तम हवा, सुरक्षित
* 69-99-सामान्य
* 100-149-हल्का प्रदूषण, सांस के मरीजों के लिए सतर्कता जरूरी
* 150-200-बेहद प्रदूषित हवा सभी के लिए नुकसानदेह
* 201- 299-हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर
* 300 से ज्यादा-अधिक हानिकारक, हृदय, लंग्स और ब्रेन के लिए खतरनाक
सांस और ह्दय रोगियों के लिए खतरा
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवोत्तम नारंग ने बताया कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौत में से 60 फीसदी दिल की बीमारी से होती है। पीएम 2.5 आकार के सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते कई बार दिल की धमनियों तक पहुंचकर अटैक का कारण बनते हैं। प्रदूषण से रक्तचाप भी बढ़ता है।
एक ही दिन में आंखों में जलन के बढ़ गए मरीज
प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में बढ़ी है। सीएचसी की ओपीडी में 120 मरीज पहुंचे, जिनमें अधिकांश की आंखों में जलन की ही शिकायत थी। इसके साथ ही गले में खराश ने भी लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.अतुल आनंद ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन होती है, समय समय पर ताजा पानी से आंखों को धोते रहें, चश्मों का भी प्रयोग करें।
दिवाली के बाद पिछले पांच वर्षों का एक्यूआई
वर्ष एक्यूआई ध्वनि प्रदूषण
2022 294 92 डेसीबल
2021 446 96 डेसीबल
2020 400 94 डेसीबल
2019 444 95 डेसीबल
2018 420 95 डेसीबल