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पंजीकरण, न डिग्री, फिर भी चल रहा अस्पताल

सार

महिला की हालत बिगड़ी तो उसे विशाल अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉ. दिनेश खत्री ने बताया कि यह अस्पताल भी संदेह के घेरे में है, जिसे नोटिस दिया गया है।आश्चर्य की बात यह है कि पूरा प्रकरण सामने होने पर भी स्वास्थ्य अफसरों ने चिकित्सकों को तीन दिन का समय दे दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फिर से निरीक्षण करना मुनासिब नहीं समझा।स्वास्थ्य विभाग की सांठगांठ कहें या लापरवाहीगढ़मुक्तेश्वर के साथ ही हापुड़ क्षेत्र में भी जमकर फर्जी क्लीनिक चल रहे हैं।
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विस्तार
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पंजीकरण, न चिकित्सक की डिग्री, फिर भी चल रहा अस्पताल
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हापुड़। गढ़ क्षेत्र में बच्चे की मौत के मामले से शुरू हुई जांच में चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिस अस्पताल पर कार्रवाई की थी, वह बिना पंजीकरण के ही चल रहा था वहीं चिकित्सक के पास भी कोई डिग्री नहीं थी, फिर भी महिला अपने क्लीनिक में रोजाना 10 से 12 प्रसव करा रही थी। इसी चेन को पकड़कर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को तीन अस्पताल सील तो कर दिए, लेकिन उन्हें तीन दिन का समय देकर बचाव का समय भी दे दिया। वहीं कार्रवाई के बाद भी इन अस्पतालों में आम दिनों की तरह ओपीडी सेवाएं चलती रहीं।
गढ़ क्षेत्र के अहाता बस्तीराम निवासी सौरभ ने अपनी गर्भवती पत्नी को गढ़ क्षेत्र के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया था। गर्भवती का हीमोग्लोबिन सात से भी कम था, लेकिन चिकित्सक ने रक्त के इस स्तर को अनदेखा कर दिया। पूरे दिन गर्भवती को भर्ती किए रखा, देर रात जब सामान्य प्रसव नहीं हुआ तो उसे पहले से ही सील एमजीएसएस अस्पताल में भर्ती करा दिया।
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एसीएमओ डॉ. दिनेश खत्री ने बताया कि एमजीएसएस अस्पताल में गर्भवती का ऑपरेशन से प्रसव कराया गया, यह अस्पताल पहले से ही सील है। यहां नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे मेरठ रेफर कर दिया गया था, जहां बच्चे की मौत हो गई। महिला की हालत बिगड़ी तो उसे विशाल अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉ. दिनेश खत्री ने बताया कि यह अस्पताल भी संदेह के घेरे में है, जिसे नोटिस दिया गया है।
आश्चर्य की बात यह है कि पूरा प्रकरण सामने होने पर भी स्वास्थ्य अफसरों ने चिकित्सकों को तीन दिन का समय दे दिया। बृहस्पतिवार को अस्पतालों में सील तो लगीं, लेकिन शुक्रवार को ही इनमें ओपीडी सेवा शुरू हो गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फिर से निरीक्षण करना मुनासिब नहीं समझा।
स्वास्थ्य विभाग की सांठगांठ कहें या लापरवाही
गढ़मुक्तेश्वर के साथ ही हापुड़ क्षेत्र में भी जमकर फर्जी क्लीनिक चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग नोटिस तो जारी करता है, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं करता। ऐसे में इसे विभाग की सांठगांठ कहा जाए या लापरवाही। कुल मिलाकर अफसरों की इस नूरा कुश्ती से मरीजों की जान पर खतरा बढ़ रहा है।
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बड़े स्तर पर होगी कार्रवाई
बिना पंजीकरण और डिग्री के अस्पताल चलाने वालों पर अब शिकंजा कसने का समय आ गया है। बड़े स्तर पर अब एफआईआर होंगी। बिना पंजीकरण और डिग्री के ही महिला रोजाना 10 से 12 प्रसव करा रही थी। अब नोटिस के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।--डॉ.केपी सिंह, एसीएमओ, नोडल।
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