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विजिलेंस टीम ने एलएंडटी कंपनी के परिसरों में पकड़ी बिजली चोरी

सार

विजिलेंस टीम ने एलएंडटी कंपनी के परिसरों में पकड़ी बिजली चोरीहापुड़।विजिलेंस टीम के अधिकारी ने बताया कि मुख्य बात यह है कि एलएंडटी ने किसानों से जमीन ली, साथ ही करीब 9 नलकूपों का बिल खुद ही वहन कर किसानों से समझौता करा लिया।विजिलेंस के अनुसार इसका जुर्माना करीब 80 लाख रुपये बैठता है।
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गांव में चेकिंग करने पहुंची विजिलेंस की टीम। संवाद - फोटो : HAPUR
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विजिलेंस टीम ने एलएंडटी कंपनी के परिसरों में पकड़ी बिजली चोरी
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हापुड़। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण की कार्यदायी संस्था एलएंडटी के अटौला और भैना में बने परिसरों में करीब 80 लाख की बिजली चोरी पकड़ी गई है। करीब 200 बीघा जमीन पर बने परिसरों में 9 नलकूपों की बिजली से कॉमर्शियल परिसरों में आपूर्ति की जा रही थी। सब्सिडी वाले कनेक्शन एलएमवी-2 (कॉमर्शियल श्रेणी) में स्थानांतरित नहीं कराए गए थे, विजिलेंस के एई ने यह जानकारी दी। वहीं, विजिलेंस ने देर रात छापा मारकर, करीब 88 हार्सपावर का विद्युत भार पकड़ा, दोनों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है।
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी कंपनी को मिली है। इस कंपनी ने किठौर रोड स्थित अटौला और ठेरा/भेना में अपने परिसर बनाए हैं। जिनमें मैटेरियल सप्लाई की सामग्री के साथ ही अधिकारियों के आवास भी बनाए गए हैं। दोनों गांवों में करीब 200 बीघा जमीन किसानों से किराये पर ली गई है।
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विजिलेंस टीम के अधिकारी ने बताया कि मुख्य बात यह है कि एलएंडटी ने किसानों से जमीन ली, साथ ही करीब 9 नलकूपों का बिल खुद ही वहन कर किसानों से समझौता करा लिया। दोनों ही परिसरों में करीब 88 हॉर्सपावर भार का लोड था, जो एलएमवी-5 श्रेणी (सब्सिडी कनेक्शन) की विधा में ही प्रयोग किया जा रहा था। जबकि परिसर में कॉमर्शियल कनेक्शन लिया जाना अनिवार्य है या फिर एलएमवी-5 को एलएमवी-2 विधा में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था।
कार्रवाई के दौरान कंपनी के अधिकारी नियम के अनुसार ही बिजली के प्रयोग का दावा करते रहे, लेकिन कागजी कार्रवाई में वह फंस गए, कॉमर्शियल कनेक्शन का कोई साक्ष्य वह नहीं दे सके। मामले की गंभीरता पर विजिलेंस के एई एससी यादव, प्रभारी निरीक्षक मुमताज खान, एसडीओ गढ़ प्रभव हरित, हेड कांस्टेबल ब्रजेंद्र सिंह, दीपक सिंह, सचिन, अंकित, अफरोज ने थाने में तहरीर दी है। विजिलेंस के अनुसार इसका जुर्माना करीब 80 लाख रुपये बैठता है।
ऊर्जा निगम के अधिकारियों को नहीं लगी भनक-
कई महीने से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन बिजली निगम के कर्मचारी और अधिकारियों को इसकी भनक तक ही नहीं लग सकी, कि सब्सिडी वाले नलकूप कनेक्शन की आपूर्ति को कॉमर्शियल विधा में प्रयोग किया जा रहा है।
मीटर लगवाना भी नहीं लगवाया
गंगा एक्सप्रेसवे का काम कर रही संस्था ने परिसर में मीटर लगाकर सप्लाई लेना भी मुनासिब नहीं समझा। सीधे नलकूपों की बिजली का प्रयोग ऐसे ही किया जा रहा था। विजिलेंस को मुखबिर की सटीक सूचना पर सफलता मिली।
जनरेटर से परिसर में सप्लाई की व्यवस्था
परिसर में जनरेटर से बिजली सप्लाई दी जाती है, कनेक्शन के लिए करीब दस दिन पहले एस्टीमेट का करीब 50 लाख रुपये जमा भी कर दिया है। किसानों ने ही आग्रह किया था कि उनके नलकूपों का कनेक्शन न कटवाया जाए, नलकूपों की बिजली इस्तेमाल नहीं की जा रही है। गलत तरीके से यह कार्रवाई की गई है। - केके सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एलएंडटी।
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अधिशासी अभियंता को दिए हैं जांच के आदेश-
एलएंडटी कंपनी के परिसरों में विजिलेंस की कार्रवाई का मामला संज्ञान में है। कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने एस्टिमेट का पैसा जमा कर दिया है। गलती किस स्तर पर हुई, इसकी जांच अधिशासी अभियंता गढ़ को सौंपी गई है।---यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।
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