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बुकलाना में मिले दो लंपी संक्रमित पशु, पैंठ पर लगी रोक

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बुकलाना में मिले दो लंपी संक्रमित पशु, पैंठ पर लगी रोक
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हापुड़। पशुओं में लंपी बीमारी का प्रकोप बढ़ने लगा है, अब बुकलाना में भी दो संक्रमित पशु मिले हैं। शनिवार को हापुड़ में लगने वाली साप्ताहिक पशु पैठ को बंद रखने के आदेश दिए हैं, साथ ही बाहर से आने वाले पशुओं की खरीद फरोख्त भी बंद करा दी गई है। पशुपालन विभाग की टीम ने गांवों में डेरा डाल दिया है, बीमार पशुओं के सैंपल जांच को भोपाल भेजे जा रहे हैं, साथ ही एंटी बैक्टीरिया का स्प्रे कराया जा रहा है।
शुकरामपुर में इस बीमारी का प्रकोप सबसे अधिक है। साथ ही धनपुरा में भी पांच से अधिक पशु लंपी बीमारी से संक्रमित मिले हैं। गोवंश पर इस बीमारी का अधिक असर है, क्योंकि गाय की त्वचा भैंस के मुकाबले बारीक होती है। यह रोग भी त्वचा संबंधी है, जो गायों में ही सबसे अधिक देखने को मिल रहा है।
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दस गांवों के अलावा अब बुकलाना में भी इसका असर दिखा है, यहां दो पशुओं में बीमारी के लक्षण मिले हैं। जिनका सैंपल एकत्र कर लिया गया है, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि सोमवार को किसी पशु की मौत इस बीमारी से नहीं हुई है।
एहतियातन जिले में लगने वाली साप्ताहिक पशु पैठ को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। शासन की गाइडलाइन में भी पैठ पर रोक लगाने के आदेश थे। इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले पशुओं को जिले में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए चौकियां भी स्थापित करायी जा रही हैं।
सोमवार को सीवीओ डॉ.प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीमों ने गांवों का दौरा कर, बीमार पशुओं की स्थिति को जाना। साथ ही पशुओं का उपचार कर, पशुपालकों को सावधानी बरतने की हिदायत दी। गांवों में स्प्रे भी कराया गया।
इन गांवों में पहुंची बीमारी
शुकरामपुर, डिबाई, शरीकपुर, धनपुरा, सिलारपुर, श्यामपुर, मुक्तेश्वरा, मतनौरा, अट्टा, औरंगाबाद, बुकलाना।
3427 गोवंशों की सेहत पर खतरा
लंपी बीमारी का प्रकोप गोवंशों पर अधिक है, जिले में 38 गोआश्रय स्थल संचलित हैं। इन आश्रय स्थलों में 3427 गोवंशों का संरक्षण हो रहा है। पशुपालन विभाग गोवंशों की सेहत को लेकर अलर्ट हो गया है। अभी तक गोशालाओं में इस रोग के नहीं फैलने का दावा किया जा रहा है।
पशु के संक्रमित होने का कारण
* मवेशियों या जंगली भैंसों में यह रोग गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के संक्रमण के कारण होता है।
*यह वायरस केप्रिपॉक्स वायरस जीनस के भीतर तीन निकट संबंधी प्रजातियों में से एक है, इसमें अन्य दो प्रजातियां शीपपॉक्स वायरस और गोटपॉक्स वायरस हैं।
लंपी रोग के लक्षण
*इ स बीमारी में शरीर पर गांठें बनने लगती हैं. खासकर सिर, गर्दन, और जननांगों के आसपास।
* इसके बाद धीरे-धीरे गांठे बड़ी होने लगती हैं और फिर ये घाव में बदल जाती हैं।
* इस बीमारी में गाय को तेज बुखार आने लगता है।
* गाय दूध देना कम कर देती है।
* मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है।
* यह पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गांठ के रूप में प्रकट होता है।
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* इसके अन्य लक्षणों में सामान्य अस्वस्थता, आंख और नाक से पानी आना, बुखार तथा दूध के उत्पादन में अचानक कमी आदि शामिल है।
बीमार पशुओं का चल रहा उपचार
गांवों में जाकर बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया गया है। चार पशु स्वस्थ भी हुए हैं, पशुपालन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। बीमार पशु की सूचना विभाग को अवश्य दें।--डॉ.प्रमोद कुमार, सीवीओ।

गांव बुकलाना में लम्पी रोग से पीडित पशु का उपचार करते चिकित्सक। संवाद- फोटो : HAPUR

लम्पी रोग को लेकर ग्रामीणों के साथ बैठक करते पशु पालन विभाग के अधिकारी । संवाद- फोटो : HAPUR

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