दवाओं पर महंगाई, एक साल में 15 फीसदी बढ़ गए दाम
हापुड़। जीवन रक्षक दवाओं के दामों में बीते साल के मुकाबले 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोत्तरी कर दी गई है। हृदय रोग संबंधी दवाओं पर सबसे अधिक महंगाई है, इसके साथ ही मधुमेह, बीपी, एंटी बॉयोटिक दवाओं के दामों में भी उछाल आया है। मरीजों के जीवन में शामिल हो चुकी इन दवाओं को खरीदने में जेबें ढीली हो रही हैं। दवा कारोबारियों का दावा है कि कच्चे माल में इजाफा और कंपनियों द्वारा रेट बढ़ाए जाने से ही दवाएं महंगी हुई हैं।
मार्च 2022 में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने विभिन्न मर्जों में काम आने वाली करीब 800 दवाओं के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की स्वीकृति दी थी। इस स्वीकृति के बाद दवा कंपनियों ने अपने खर्चों के अनुसार ही दवाओं के दाम में इजाफा कर दिया है।
जिले में इस समय मधुमेह, रक्तचाप जैसी समस्याओं से बड़ी आबादी जूझ रही है। बिना दवा सेवन के इन मरीजों के लिए स्वस्थ रह पाना मुश्किल है। मजे की बात यह है कि इस बढ़ती महंगाई में सरकारी अस्पतालों के दवा काउंटरों से मधुमेह की दवाएं गायब हो चुकी हैं। ऐसे में प्राइवेट मेडिकल स्टोर ही मरीजों का सहारा बने हैं।
प्रमुख दवाओं की कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी
मधुमेह (शुगर) की दवा-
दवा 2021 रेट वर्तमान रेट
ग्लायकोमेट 250 11.87 14.29
ग्लायकोमेट जीपी 2 103.66 113.83
ओजोमैट पीजी 2 26.62 29.28
रक्तचाप की दवा --
टेल्मा सीटी 149.33 163.66
टेल्मा एच 161.33 176.66
ह्दय रोग की दवा---
इकोस्प्रिन गोल्ड 10 68.78 72.33
रोस्यूवास 20 336 360
एंटीबायोटिक दवा--
नोरफ्लोक्स 400 64.52 70.97
ओफ्लोक्स ओजेड 150.38 165.41
(नोट : दवा विक्रेताओं से लिए गए खुदरा मूल्य प्रति 10 टैबलेट की कीमत रुपये में।)
इन बीमारियों की दवाएं की कीमत में भी बढ़ोतरी
दवा विक्रेताओं के अनुसार 36 श्रेणियों में 376 दवाएं रखी गई हैं। इसमें बुखार, त्वचा, संक्रमण, एनिमिया, किडनी, विषरोधी, खून पतला करने, कुष्ठ रोग, टीबी, माइग्रेन, पार्किसन, डिमोशिया, साइकोथेरैपी, हार्मोन, उदर रोग की दवाओं की कीमतें भी बढ़ी हैं।
कच्चे माल के दामों में उछाल से बढ़े रेट
कच्चे माल के दामों में उछाल आने से दवाओं के रेट तेजी से बढ़े हैं। दवा कंपनियों ने ही रेट बढ़ाए हैं, जिसके चलते मरीजों को भी बढ़े दामों पर ही दवाएं दी जा रही हैं। प्रतिदिन 50 लाख से अधिक का दवा कारोबार हापुड़ में होता है, जिसमें सबसे अधिक दवाएं मधुमेह, ह्दय, बीपी की दवाएं ही जाती हैं। - विकास गर्ग, महामंत्री, हापुड़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन।--फोटो संख्या--01
दवाओं की बढ़ती कीमतों पर संज्ञान ले सरकार
कोरोना महामारी के दौर में जिस तरह दवाओं दाम बढ़े हैं, उनसे मरीज काफी परेशान हैं। सरकार को चाहिए कि दवाओं के दामों को सॉल्ट के अनुसार एक ही श्रेणी रखे, ताकि अलग अलग कंपनियां अपनी मन मर्जी न चला सकें। जीवन रक्षक दवाओं के दामों में एक साल के अंदर 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। - दिनेश त्यागी, अध्यक्ष, हापुड़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन।--फोटो संख्या--02