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मेरठ रोड पर लगीं स्ट्रीट लाइटें लगाकर भूले, छह साल से नहीं हुई रोशन

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मेरठ रोड पर लगीं स्ट्रीट लाइटें लगाकर लगाकर भूले, छह साल से नहीं हुई रोशन
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हापुड़। सरकारी धन का दुरुपयोग कैसे होता है इसकी एक बानगी मेरठ रोड पर देखने को मिलेगी। हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा छह साल पूर्व अवस्थापना निधि से करीब 60 लाख की लागत से स्ट्रीट लाइटें लगवाकर नगर पालिका को हैंडओवर की थी। ये लाइटें कुछ महीने ही जलकर बंद हो गईं, लेकिन इसके बाद इन्हें चालू कराने की जहमत नहीं उठाई गई। नगर पालिका ने सीमा क्षेत्र से बाहर होने का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया।
नगर के मेरठ रोड पर रात को अंधेरा पसरा रहता था। यहां आए दिन दुर्घटनाओं के अलावा आपराधिक घटनाएं होती थीं। स्थानीय लोगों की मांग पर हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2015-16 में अपनी अवस्थापना निधि के 60 लाख रुपये खर्च कर भारत पेट्रोल पंप से असौड़ा मोड़ तक करीब 32 स्ट्रीट लाइट के पोल लगाए थे। इन पोल पर लाइटें लगी तो स्थानीय लोगों को राहत मिली। प्राधिकरण ने इन लाइटों को नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया था। तत्कालीन नगर पालिका के अधिकारियों ने प्राधिकरण की सभी शर्तों को मानते हुए जनहित में इन लाइटों को बिजली के कनेक्शन दिए और इन्हें चालू करा दिया। लेकिन कुछ माह बाद ये बंद हो गईं। नगर पालिका ने इन सभी लाइटों से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ये सभी पोल उनकी सीमा क्षेत्र से बाहर हैं। जबकि हैंडओवर करते समय यह तर्क नहीं दिया गया था। तभी से ये लाइटें बंद पड़ी हैं। हालांकि बीच में एक बार कांवड़ मेले के दौरान जरूर इन लाइटों को चालू किया गया। जानकारी के अनुसार नगर पालिका इन लाइटों को चालू कराने के लिए अच्छी खासी धनराशि खर्च की। लेकिन कुछ दिन चलकर ये फिर बंद हो गई, वर्तमान में हालात यह है कि सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। सड़क पर अंधेरा रहने से आपराधिक घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।
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नगर पालिका को किया हैंडओवर
प्राधिकरण ने इन लाइटों को अवस्थापना निधि से लगवाया था। लाइटों को लगवाकर उन्हें नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया था। अब इन्हें जलाने या रखरखाव आदि की जिम्मेदारी नगर पालिका की है।-प्रदीप कुमार , सचिव एचपीडीए।
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