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कई साल बाद दिवाली पर बन रहा विशेष योग

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सुबह 6.03 से रात्रि 2.44 बजे तक कर सकते हैं पूजा
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हापुड़। पंचांग के अनुसार दिवाली का त्योहार हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। अंधकार पर प्रकाश की विजय वाले इस पर्व पर मां लक्ष्मी, गणेश व कुबेर की पूजा करने का विधान है। पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि अमावस्या तिथि 4 नवंबर को सुबह 6.03 बजे से आरंभ होगी जो 5 नवंबर को रात्रि 2.44 मिनट पर समाप्त होगी। दीपावली पर स्वाति नक्षत्र आयुष्मान योग एवं शुभ ग्रह नक्षत्रों से अद्भुत संयोग बन रहा है। इस खास योग में पूजा करने से लोगों को विशेष लाभ मिलेगा।
पूजा का शुभ मुहुर्त-
कुंभ लगन में 1.40 बजे से 3.08 बजे तक व वृष लग्न में 6.08 बजे से 8.03 बजे तक लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहुर्त रहेगा। अमृत चौघड़िया में 5.35 बजे से 6.25 बजे का पूजन किया जा सकता है।
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अन्नकूट पूजन -
पूजन के लिए शुभ चौघड़िया में सुबह 7.57 बजे से 9.19 बजे तक
दोपहर में 12.04 से 1.26 बजे तक पूजा का शुभ मुहुर्त रहेगा। सांयकाल में 6.05 बजे से लेकर 8.00 बजे तक पूजन करना शुभ रहेगा।
कैसे करें पूजन -
घर के पूर्व उत्तर के ईशान कोण लीपकर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और धातु निर्मित गणेश, लक्ष्मी, कुबेर का शुद्ध जल में स्नान कराकर चौकी पर स्थापित करें। रोली, चंदन, पुष्प, फल, पान आदि के द्वारा गणपति, लक्ष्मी का पूजन करें।
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