धरोहर तलाशने में जुटा ततारपुर गुरुकुल
हापुड़। ततारपुर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय ने जिले की धार्मिक और एतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए मुहिम छेड़ी है। ऐसी धरोहरों की पहचान करने के बाद गुरुकुल की ओर से एक पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा। जिसके माध्यम से लोगों इन धरोहरों के प्रति जागरूक किया जाएगा। पत्रिका के लिए प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने संदेश लिखा है। पत्रिका का नाम हरिपुरसम्पदा होगा।
ततारपुर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय के आचार्य कुशलदेव ने बताया कि हापुड़ खुद एक ऐतिहासिक शहर है। इसे प्राचीन काल में हरिपुर नाम से जाना जाता था। इसके बाद यह नाम बिगड़तेे बिगड़ते हापुड़ हो गया। हापुड़ जितना खुद एतिहासिक है, उतने इसकी धरोहर एतिहासिक हैं। ब्रजघाट से लेकर धौलाना तक कितने ही स्थान ऐसे हैं, जो अपनी धार्मिक और एतिहासिक पहचान रखते हैं। गंगा की धार्मिक मान्यता के साथ यहां शहीदों की कुर्बानियों की अनगिनत गाथाएं हैं। इन शूरवीरों की गाथाओं को नई पीढ़ी के सामने लाने के लिए यह अभियान छेड़ा गया है। इसके तहत महाविद्यालय के शिक्षक व छात्रों द्वारा एक पत्रिका हरिपुरसम्पदा के नाम से प्रकाशित किए जाने की योजना है।
पूरा विवरण होगा अंकित
पत्रिका में इन धराहरों का फोटो सहित पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। पत्रिका पूरी तरह से रंगीन होगी और एक धरोहर का एक बड़ा फोटो होगा। फिलहाल गुरुकुल की ओर से ऐसी धरोहरों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है।
पत्रिका के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने लिखे संदेश
पत्रिका के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संदेश लिखा है। राज्यपाल ने अपने लेख में लिखा है कि स्वतंत्रता आंदोलन में चौरा चौरी घटना का विशेष महत्व है। इस घटना ने आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी। मुझे विश्वास है कि इसी प्रकार यह पत्रिका में आजादी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश किया जाएगा और युवा पीढ़ी को अपने इतिहास को जानने में सहायता मिलेगी। जबकि मुख्यमंत्री ने लिखा है कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में शिक्षा का योगदान सर्वविदित है। व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा को संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। महाविद्यालय द्वारा स्मारिका का प्रकाशन एक सराहनीय पहल है।
यह स्थान होंगे शामिल
धौलाना, हापुड़ रामलीला मैदान और अतरपुरा चौपला का शहीद स्थल, मुकीमपुर गांव में अंग्रेजों से हुई क्रांतिकारियों का भिड़ंत स्थल, गढ़ गुरुद्वारा जहां गुरुनानक जी का आगमन हुआ था, शंकरटीला, ब्रजघाट, नक्काकुंआ, चंडी मंदिर, सबली मंदिर, छपकौली मंदिर, दतियाना में दत्तात्रे की तपस्थली, नगर पालिका का घंटाघर, संस्कृत विद्यालयों का इतिहास आदि।