मिलावट: 3 साल में 70 प्रतिशत नमूने फेल
हापुड़। भले ही सरकारी मशीनरी हर साल त्योहारों के अलावा समय-समय पर खाद्य सामग्री के नमूने भर कार्रवाई करती हो, लेकिन हापुड़ में प्रयोगशालाओं में लिटमस टेस्ट के बाद करीब 70 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इस वजह से लोगों की थाली में शुद्ध खाद्य सामग्री नहीं पहुंच पाती है। लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
विभागीय टीम होली, दीपावली, रक्षाबंधन व आम दिनों में हर साल करीब 250 से 300 तक नमूने भरते हैं। इनमें से करीब 220 से 240 तक नमूने अधोमानक घोषित हो जाते हैं। हापुड़ खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे लोगों पर नकेल कसने के लिए कार्रवाई कर जुर्माना भी वसूलता है। लेकिन जिले में मिलवाटखोरी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। मिलावटखोरों से हर साल करीब 40 से 45 लाख जुर्माना भी वसूला गया है।
इन खाद पदार्थों के लिए थे नमूने
विगत तीन साल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी रोकने के लिए जगह-जगह छापे मारे थे। इस दौरान दूध, घी, पनीर, मिठाई के सैंपल लिए गई थे। जिसमें अधिकांश नमूने जांच में फेल हो गए थे। इसके अलावा राशन की दुकानों से भी चावल, आटा और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने भरे गए थे। नमूने फेल होने पर दुकानदारों पर जुर्माना लगाया था। साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी गई थी।
दोबारा फेल होने पर दोगुना जुर्माना
खाद्य नमूने फेल होने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन दोबारा नमूना फेल होने पर दोगुना जुर्माना वसूले जाने का प्रावधान है। हापुड़ खाद्य सुरक्षा विभागीय अधिकारियों की मानें तो दोबारा नमूने फेल होने का मामले पिछले तीन वर्षों में नहीं आए हैं। जेल भेजे जाने की भी कार्रवाई नहीं हुई हैं।
वर्ष 2018-19 स्थिति
जुर्माना 45 लाख
नमूने 286
अधोमानक 242
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वर्ष 2019-20 स्थिति
जुर्माना 42 लाख
नमूने 282
अधोमानक 231
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वर्ष 2020-21 स्थिति
जुर्माना 31 लाख
नमूने 233
अधोमानक 160
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स्वयं भी बरतें सावधानी
-खाने पीने की सामग्री लेते समय मैन्यूफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट आदि जानकारी देखें
-मिलावटी सामान का शक होने पर तत्काल विभागीय को सूचित करें
-वजन व मापतौल की समस्या होने पर मापतौल विभाग को रिपोर्ट करें
-स्वयं भी खाने पीने सामग्री के मिलावट की विभागीय मदद से जांच कर सकते हैं
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी पवन कुमार का कहना है कि त्योहारों के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी खाद्य सामग्री के नमूने भरे जाते हैं। प्रयोगशाला की जांच में फेल होने पर मिलावटखोरों पर जुर्माना भी लगाया जाता है। आगे भी अभियान चलाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी हाल में खाद्य सामग्री की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।