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कोरोना कफ्र्यू से टूटी बर्तन कोरोबार की कमर

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कोरोना कर्फ्यू से टूटी बर्तन कारोबारियों की कमर
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हापुड़। कोरोना कर्फ्यू ने जिले के बर्तन कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। दुकानें बंद होने और ऑक्सीजन की उद्योगों को सप्लाई न होने के कारण इस कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ा है। अधिकतर फैक्टरी बंद हैं और दुकानों में करीब 50 करोड़ का माल फंसा हुआ है, जिसकी पिछले एक माह से बिक्री नहीं हो सकी है। ऐसे में इस धंधे से जुड़े लोग आर्थिक तंगियों से जूझ रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बर्तन बनाने के मामले में हापुड़ पहले स्थान पर है। यहां स्टील और एल्युमीनियम के सभी प्रकार के बर्तन बनाकर दूसरे जिलों को सप्लाई होते हैं। कोरोना काल में इस कारोबार पर गहरा असर पड़ा। कोरोना कर्फ्यू की आहट से मजदूर शुरूआत में ही अपने घरों को लौट गए थे। जिसके कारण पहले ही कारोबार प्रभावित था। अब कोरोना कर्फ्यू ने कारोबार को पूरी तरह बदहाल कर दिया है।
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हापुड़ जिले में करीब 150 परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से 15 हजार श्रमिकों का घर चलता है। कर्फ्यू के बाद बाजार बंद हैं। कोरोना के पीक समय में ऑक्सीजन की किल्लत के बाद सरकार द्वारा उद्योगों को सप्लाई रोक दी गई थी। इसके बाद हालात और बदतर हो गए। अब स्थिति यह है कि बर्तन कारोबार पूरी तरह से ठप है और कारोबारियों और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कारोबारियों के अनुसार करीब 50 करोड़ रुपये का माल जिले की दुकानों और गोदामों में फंसा हुआ है। जब तक इस माल की बिक्री नहीं होती है तो इस प्रकार के हालात बने रहेंगे। कुल मिलाकर कोरोना कर्फ्यू कुछ दिन और खिंचता तो है तो इस कारोबार से जुड़े लोगों को और परेशानियों से जूझना पड़ सकता है।
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