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एसएसवी पीजी कॉलेज के मुख्य नियंता ने दिया इस्तीफा

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एसएसवी पीजी कॉलेज के मुख्य नियंता ने दिया इस्तीफा
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हापुड़। दिल्ली रोड स्थित एसएसवी पीजी कॉलेज में मुख्य नियंता व इतिहास विभाग के एचओडी डॉ. सुरेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को लेकर चल रहा वाद खारिज होने पर उन्होंने यह कदम उठाया है। हालांकि कोर्ट से आदेश आने का अभी इंतजार है।
एसएसवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग में विजय भूषण आर्य वर्ष 1992 में बतौर प्रवक्ता तैनात थे। 30 जनवरी 1992 में ह्दयघात के चलते उनका निधन हो गया था। इसके बाद डॉ. सुरेंद्र सिंह उनके पद पर अध्यापन का कार्य करने लगे। लेकिन किस प्रक्रिया के तहत उनका चयन हुआ, इसका राज कई सालों तक दबा रहा।
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10 मार्च 2013 में एसएसवी कॉलेज प्रबंध समिति में सुरेश चंद संपादक सचिव चुने गए। जिसके बाद उन्होंने डॉ. सुरेंद्र सिंह की नियुक्ति के मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया। हाईकोर्ट ने उनकी नियुक्ति को असंवैधानिक माना और उन्हें हटाने का आदेश जारी किया। इस मामले में डॉ. सुरेंद्र सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने पर डॉ. सुरेंद्र सिंह फिर से कॉलेज में नौकरी करने लगे। करीब छह सालों से कोर्ट में इस मामले का ट्रायल पर चल रहा था। तीन मार्च 2021 को सुप्रीम कोर्ट में मामला खारिज हो गया। इसके बाद डॉ. सुरेंद्र सिंह ने अपना इस्तीफा कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रेनू बाला को सौंप दिया। उनके अचानक इस्तीफा देने से शिक्षकों में खलबली मच गई है।
कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव सुरेश चंद संपादक द्वारा कोर्ट में दिए साक्ष्यों के अनुसार कॉलेज में इतिहास विषय के प्रवक्ता डॉ. विजय भूषण आर्य की मृत्यु के बाद डॉ. सुरेंद्र सिंह यहां अध्यापन कार्य करने लगे। डॉ. सुरेंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय में वर्ष 1996 में दायर याचिका में अपनी नियुक्ति 1988-89 में होना बताया। जबकि वर्ष 1993 में दायर याचिका में उन्होंने अपनी नियुक्ति 1993 में होना स्वीकार किया था। जबकि वित्त एवं लेखाधिकारी ने उनकी नियुक्ति की तिथि अलग ही दर्शायी है। इस मामले में डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना था कि वह उस समय अस्थाई थे, जिसके चलते कभी उन्हें हटा दिया जाता और कभी रख लिया जाता था। यही कारण रहा है नियुक्ति की तिथि अलग अलग दर्शायी गई।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी जसवंत नेगी ने सुरेंद्र सिंह की कॉलेज में नियुक्ति को कूटरचित/फर्जी अभिलेखों के आधार होना बताकर उनके विरुद्ध कोतवाली हापुड़ में एफआईआर दर्ज करायी थी। 18 अप्रैल 2014 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव सुरेश चंद संपादक ने बताया कि उन्होंने असंवैधानिक तरीके से नियुक्ति पाने वाले को सजा दिलायी है। प्रबंध समिति के पदाधिकारी हमेशा ही उनसे इस मामले को लेकर सौतेला व्यवहार करते आए हैं, कोर्ट में भी वह निजी पैसों से यह केस लड़े। कॉलेज की छवि धूमिल करने वालों को वह नहीं छोड़ेंगे।
कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष विजय कुमार गोयल ने बताया कि डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बुधवार को इस्तीफा दिया था, जो उन्हें प्राचार्य ने दिया है। कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है, हालांकि कोर्ट में केस सचिव ही लड़ रहे थे, इसकी जानकारी वही सही तरीके से दे पाएंगे।
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कॉलेज प्रबंध समिति के उप सचिव अमित अग्रवाल ने बताया कि प्रबंध समिति की 16 दिसंबर 2020 की बैठक में डॉ. सुरेंद्र सिंह का विषय एजेंडा संख्या 10 में आया। इसमें उच्च शिक्षा अधिकारी के पत्र के आलोक में सहमति बनी कि जो निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का होगा, उसका पालन किया जाएगा।
उधर, डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश आएगा, उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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