मंडी में दो रुपये किलो बिक रही बंदगोभी, किसानों ने 25 बीघा फसल कर दी नष्ट
हापुड़। बंद गोभी के गिरते दाम के चलते महमूदपुर गांव में किसानों ने करीब 25 बीघा फसल को जोत दिया। 28 हजार रुपये/किलोग्राम की दर से बीज खरीदकर यह फसल लगाई गई थी। लेकिन इसका दाम महज दो से तीन रुपये किलो तक ही मिल पा रहा है। बुलंदशहर रोड स्थित पड़ाव पर लगने वाली अस्थाई मंडी भी वीरान पड़ी है। ऐसे में किसान इस फसल को जोत देने में ही भलाई समझ रहे हैं।
हापुड़ जिले में बड़े पैमाने पर पत्ता गोभी की खेती की जाती है। अमूमन किसान इसकी बुवाई जुलाई महीने से लेकर अक्तूबर तक करते हैं। दिसंबर, जनवरी में पत्ता गोभी के दाम एक हजार से 1500 रुपये/कट्टा तक रहे। ऐसे में किसानों को उम्मीद थी कि इस बार पत्ता गोभी से अच्छा मुनाफा हो जाएगा। लेकिन फरवरी महीने के आते ही दामों में अचानक गिरावट शुरू हो गई।
आलम यह है कि इन दिनों पत्ता गोभी का कट्टा 150-200 रुपये तक ही बिक पा रहा है। एक कट्टा में 70 किलोग्राम तक गोभी होती है, ऐसे में इसका दाम महज 2 से तीन रुपये किलोग्राम तक की किसानों को मिल पा रहा है। इतने कम दाम में फसल से मुनाफा कमाना मुश्किल है।
शनिवार को महमूदपुर गांव में टेनपाल समेत कई किसानों ने अपने खेतों में खड़ी करीब 25 बीघा बंद गोभी की फसल को जोत दिया। इन किसानों का कहना था कि एमएसपी पर कानून नहीं बनने के कारण ही फसल की बिक्री नहीं हो पा रही है। इसलिए खेत में ही फसल को जुतवा दिया है। भाकियू हाईकमान ने भी किसानों से ऐसी फसल जिनसे लागत निकाल पाना मुश्किल हो उन्हें खेत में ही जोतने के आदेश दिए हैं। बीते दिनों रसूलपुर में भी किसानों ने बंद गोभी की फसल जोती थी।
इन गांवों में होती है बंध गोभी की खेती
हापुड़ के गांव महमूदपुर, सांवई, हिमांयुपुर, ह्दयपुर, मीरपुर, घुंघराला, ततारपुर, लालपुर, सीतादेही, उबारपुर, गोंदी, सलाई, श्यामपुर, ददायरा आदि गांवों में बड़े पैमाने पर बंद गोभी की खेती होती है।
अस्थाई मंडी में ग्राहक हुए कम
बुलंदशहर रोड स्थित पड़ाव में बंद गोभी की खरीद फ्रोख्त के लिए बनी अस्थाई मंडी भी इन दिनों वीरान पड़ी। बहुत कम संख्या में ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं, जिसके चलते किसान दिल्ली आदि की मंडियों में ही माल सप्लाई कर रहे हैं। लेकिन वहां दाम कम होने से वह मायूस हैं।
बेहद महंगा हैं बंद गोभी का बीज
बंद गोभी का बीज बेहद ही महंगा है। महमूदपुर के किसानों ने 28 हजार रुपये/किलोग्राम की दर से बीज खरीदा था। ऐसे में फसल को तैयार करने में काफी लागत आई। लेकिन जब यह तैयार हुई तो किसानों को लागत भी जेब से ही लगानी पड़ी।
क्या कहते हैं किसान
किसान टेनपाल सिंह का कहना है कि सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। फसलों का मुनासिब दाम नहीं मिल रहा है। इसी से खफा होकर उन्होंने पत्ता गोभी की फसल को खेत में ही जुतवा दिया है।
किसान चंद्रपाल तेवतिया ने कहा कि खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। फसलों का मुनासिब दाम नहीं मिल पा रहा है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का सपना दिखाती है, लेकिन हो कुछ नहीं रहा।
किसान जंगपाल सिंह ने बताया कि बंद गोभी की खेती करने वाले किसान चौपट हो रहे हैं। क्योंकि काफी लागत लगाने के बाद भी अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने करीब पांच बीघा फसल जुतवा दी है।
किसान आत्माराम ने बताया कि फसल का अच्छा दाम नहीं मिलने से किसान फसल जोत रहे हैं और जिला प्रशासन को इसकी सुध ही नहीं है। कृषि विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं आता।
अधिकारी कहिन-
जिला उद्यान अधिकारी एसके शर्मा ने बताया कि बाजार में बंद गोभी की आवक बढने से दाम घटे हैं। इस समय फसल पीक पर है, वह लगातार फसलों का निरीक्षण कर रहे हैं।