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जिला अस्पताल में रेबीज की वैक्सीन खत्म, मरीज परेशान

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जिले के सरकारी अस्पतालों में एक सप्ताह से रेबीज की वैक्सीन का स्टॉक खत्म पड़ा हुआ है। पत्राचार के बावजूद वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराया जा सकी है। दो फरवरी को सिर्फ 50 डोज मिली थी, जो एक दिन में ही खत्म हो गई। ऐसे में खूंखार कुत्ते, बंदर रोजाना लोगों को शिकार बना रहे हैं। गरीब लोग अस्पतालों में मायूस लौट रहे हैं ,ऐसे में उनमें रेबीज फैलने का खतरा बढ़ रहा है। वहीं कुछ लोगों को मेडिकल स्टोर से मंहगे दामों पर वैक्सीन खरीदकर लगवानी पड़ रही है।
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जिले में बंदर व कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रोजाना औसतन 400 से 500 लोगों को यह अपना शिकार बनाते हैं। निजी मेडिकल स्टोर पर रेबीज की वैक्सीन करीब 400 रुपये में मिलती है। इसलिए लोग सरकारी अस्पतालों का ही सहारा लेते हैं। क्योंकि यहां निशुल्क वैक्सीन लगाई जाती है।

बीते एक सप्ताह से जिले में रेबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म है। दो फरवरी को सिर्फ 50 डोज जिले को प्राप्त हुई थी। इनमें महज 500 लोगों का ही काम चल सका। ऐसे में अब रोजाना लोग अस्पताल जाते हैं और वैक्सीन नहीं होने की बात सुन मायूस होकर वापस लौट आते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लखनऊ तक कर्मचारियों को भी भेजा जा रहा है। लेकिन वैक्सीन का स्टॉक प्राप्त नहीं हो सका है। बता दें कि प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर रेबीज की वैक्सीन 400 रुपये से अधिक कीमत पर मिलती है। ऐसे में बहुत से लोग बिना वैक्सीन लगाए ही घरेलू उपचार करा लेते हैं, ऐसे में रेबीज फैलने का खतरा बढ़ गया है।

बंदरों के आतंक से बच्चे की जा चुकी है जान
जिले में बंदर, कुत्तों के आतंक से लोग जान तक गवां चुके हैं। बीते दिनों गढ़मुक्तेश्वर में एक बच्चा बंदरों के हमले के चलते छत से गिर गया। जिसकी मौत हो गई। इसके अलावा श्यामनगर गांव में बंदरों के झुंड ने छत पर काम कर रही लड़कियों पर हमला किया। जिसमें 6 लड़कियों को गंभीर चोट आयी, दो के पैर की हड्डी भी टूट गई।

घरेलू झाड़ फूंक नहीं है उपचार
बहुत से लोग बंदर, कुत्तों के काटने पर घरेलू झाड़ फूंक कर ही घायल को दिलासा दे देते हैं। लेकिन यह उपचार नहीं है, इस स्थिति में कभी भी मरीज को रेबीज की बीमारी हो सकती है। वैक्सीन ही इससे बचाव का एक मात्र उपाय है।

जानलेवा है रेबीज, नहीं कोई उपचार
रेबीज की बीमारी जानलेवा है, कुत्ता, बंदर व अन्य जानवरों के काटने से यह होती है। चिकित्सकों की मानें तो इसका कोई उपचार नहीं है, इसकी चपेट में आने पर मरीज की जान तक चली जाती है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि रेबीज वैक्सीन के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही जिले को रेबीज वैक्सीन प्राप्त हो जाएगी।
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