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अब जिले से विदेशों में निर्यात होगा बासमती धान, मालामाल होंगे किसान

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Dhan - फोटो : amar ujala
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अब जिले से विदेशों में निर्यात होगा बासमती धान, मालामाल होंगे किसान
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हापुड़। जिले से अब बासमती धान का निर्यात विदेशों में किया जा सकेगा। बासमती निर्यात बोर्ड और कृषि विज्ञान केंद्र मिलकर इस मुहिम को साकार करेंगे। पहले चरण में जिले से 100 किसानों के समूह को 12 फरवरी में प्रशिक्षण दिया जाएगा। गलत दवाओं के इस्तेमाल से यहां का धान निर्यात के मानकों को ही पूरा नहीं कर पाता। ऐसे में घरेलू बाजारों में ही लाखों क्विंटल धान बिक्री करनी पड़ती है।
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश बासमती चावल का प्रमुख केंद्र है। मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात बोर्ड बासमती धान की गुणवत्ता को लेकर अनेक अभियान चलाता है। लेकिन जिला इससे अभी तक दूर था। यही कारण रहा कि जिले का कोई किसान इस तरह की धान पैदा नहीं कर सका, जिसे निर्यात बोर्ड विदेशों में भेज सके।
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जानकारी के अभाव में यहां के किसान धान को तैयार करते समय गलत दवाओं का प्रयोग करते हैं। इस दवा के प्रयोग से धान निर्यात के समय सैंपलिंग में फेल हो जाता है, क्योंकि इसमें पेस्टीसाइड के अंश उस समय तक भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में यहां उत्पादित धान को घरेलू बाजारों में ही बिक्री करना पड़ता है।
सरकार हर साल धान खरीद का एमएसपी तय करती है, जिले में धान का कोई सरकारी खरीद केंद्र भी नहीं है। ऐसे में आढ़तियों के हाथों धान की खरीद होती है, जो मन चाहे दामों पर इसे खरीदते हैं। ऐसे में किसानों को मुनासिब दाम भी नहीं मिल पाता है।
इस समस्या से निजात दिलाने को अब बासमती निर्यात बोर्ड ने कमर कस ली है। कृषि विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर जिले में कृषि वैज्ञानिक इस तरह धान का उत्पादन कराएंगे जिससे धान को विदेशों में आसानी से निर्यात कराया जा सके और सैंपल भी फेल न हों। जिले में 12 फरवरी को कृषि विज्ञान केंद्र पर 100 किसानों के समूह को प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रोपीकोना जोल दवा बन रही निर्यात में रोड़ा
जिले में किसान धान पर बाली आने के बाद पीला रतवा नामक बीमारी को रोकने के लिए प्रोपीकोना जोल दवा का छिड़काव कर देते हैं। बाली आने पर इस दवा का प्रयोग प्रतिबंधित है, फिर भी किसान जानकारी के अभाव में ऐसा करते हैं। ऐसे में धान सैंपल में ही फेल हो जाता है।
इन देशों में है बासमती की डिमांड
बासमती चावल देश ही नहीं विदेशों में भी पसंद किया जाता है। देश में उत्पादित धान को चाइना, नाइजिरिया, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए, ब्रिटेन आदि देशों में सप्लाई किया जाता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी हंसराज सिंह ने बताया कि धान की गुणवत्ता सुधारने को बासमती निर्यात बोर्ड से वैज्ञानिक जिले में आकर किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद यहां की धान को विदेशों में भी निर्यात किया जा सकेगा।
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