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योजनाएं बेशुमार, नहीं हुआ बालिकाओं का उद्धार

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योजनाएं बेशुमार, नहीं हुआ बालिकाओं का उद्धार
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हापुड़। मिशन शक्ति के तहत पिछले करीब दो माह से जिले में महिलाओं, बालिकाओं के उत्थान के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद बालिकाओं के उत्थान से जुड़ी योजनाएं परवान नहीं चढ़ रही हैं। बड़ी बात है कि जब ऐसी योजनाओं के संबंध में विभागों के अधिकारियों से पूछा गया तो अधिकतर को इनकी जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में सरकार की योजनाएं पात्रों तक न पहुंचकर कागजों में ही सिमटकर रह गई हैं।
महिला सशक्तीकरण और बालिका उत्थान के लिए कई योजनाएं हैं। जिला प्रोबेशन, डाक, स्वास्थ्य, श्रम, कृषि और बैंकों द्वारा कितनी ही योजनाएं महिलाओं के लिए संचालित हैं। लेकिन अधिकारियों को केवल मुख्य योजनाओं के बारे में ही जानकारी है। जबकि कई योजनाएं ऐसी हैं, जिनके संबंध में विभाग भी एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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शासन की ओर से करीब पंद्रह योजनाएं बालिकाओं के लिए जिले में संचालित हैं। जिनमें से कुछ योजनाओं का तो लोगों को लाभ मिला है, लेकिन कुछ के बारे में तो विभाग जानकारी देने तक को तैयार नहीं हैं। बालिकाओं से जुड़ी डाक विभाग की सुकन्या समृद्धि योजना, प्रोबेशन विभाग की सुमंगला योजना, भाग्य लक्ष्मी योजना, पुत्री विवाह अनुदान योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, विश्वकर्मा श्रम कल्याण योजना संचालित हैं। लेकिन इन योजनाओं का लाभ केवल बेहद जागरूक लोगों को ही मिल पाता है।
विभाग नहीं दे पा रहे जानकारी
सुमंगला, भाग्यलक्ष्मी योजना, रानीलक्ष्मी बाई पेंशन योजना प्रोबेशन विभाग की योजनाएं हैं, लेकिन जब इन योजनाओं के बारे में उन कर्मचारियों से बात की गई, जो इनका संचालन करते हैं तो वे न तो योजनाओं की जानकारी दे पाए और न ही उनके पास यह जानकारी थी कि इनका लाभ कितने पात्रों को मिला है। शिशु हित लाभ योजना स्वास्थ्य विभाग की योजना है, लेकिन इसकी जानकारी कर्मचारियों को नहीं है। विश्वकर्मा श्रम कल्याण योजना जीएमडीआईसी विभाग की है, लेकिन इस योजना के तहत कितने पात्रों ने आवेदन किए गए इसकी जानकारी विभाग को नहीं है। डाक विभाग द्वारा अटल योजना संचालित है, लेकिन इसकी जानकारी विभाग को नहीं है। बैंक की महिलाओं को लघु उद्योग लगाने के लिए ट्रेड सब्सिडी योजना है। लेकिन जिले में इसका एक भी आवेदन नहीं है। जो योजनाएं संचालित हैं उनमें लाभार्थियों की संख्या भी काफी कम है।
बालिकाओं के लिए संचालित योजनाएं -
1-सुकन्या समृद्धि योजना के तहत डाक विभाग द्वारा 14 वर्ष तक किस्त जमा कराई जाती हैं। जिसमें 21 वर्ष के बाद एकमुश्त धनराशि 7.6 प्रतिशत ब्याज के तहत प्राप्त होती है। जिनमें करीब 11000 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला है।
2-सुमंगला योजना के तहत तीन लाख आय सीमा के सभी वर्ग के लोगों को बच्ची के जन्म के समय एक हजार रुपये, बीच बीच में पढ़ाई के लिए नौ हजार रुपये दिए जाते हैं। प्रोबेशन विभाग की इसके लाभार्थियों की जानकारी नहीं है।
3-भाग्यशाली योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार को बेटी के जन्म के समय पांच हजार रुपये और 21 साल की उम्र में दो लाख दिए जाते हैं, लेकिन विभागों को इसकी जानकारी नहीं है। जिले में इस योजना के तहत एक भी आवेदन नहीं है।
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4-शिशु हित लाभ योजना के तहत गरीब श्रमिकों के बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाती है। जिले में इसके तहत 102 लोगों को लाभ मिला।
5-मातृत्व हितलाभ योजना के तहत पंजीकृत 12 श्रमिकों को 45 हजार रुपये का भुगतान किया गया है
6-निर्माण कामगार बालिका मदद योजना के तहत श्रामिकों की बालिकाओं को आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। जिले में 28 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला
7-निर्माण कामगार पुत्री विवाह योजना के तहत श्रम विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के कामगार को दो पुत्रियों को विवाह के समय 51 हजार रुपये दिए जाते हैं।
8-किशोरी सशक्तिकरण योजना के तहत पात्र किशोरियों को खानपान और दूध आदि की व्यवस्था की जाती है। जिले में 634 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला है।
9-राष्ट्रीय परिवारिक लाभ योजना के तहत पति की मौत होने पर महिला को 30 हजार की आर्थिक मदद दी जाती है। जिले में 905 को इस योजना का लाभ मिला है।
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सीडीओ उदय सिंह का कहना है कि महिला और बालिका सशक्तीकरण संबंधी योजनाओं के सही ढंग से क्रियान्वयन के लिए विभागों को निर्देशित किया जाएगा। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी।
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