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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने की नारेबाजी

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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने की नारेबाजी
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हापुड़। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को जिले से भाकियू और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान दिल्ली बॉर्डर के लिए रवाना हुए। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं कृषि कानून वापस नहीं लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया।
भाकियू के प्रदेश सचिव रामपाल सिंह व वरिष्ठ कार्यकर्ता भगतराम ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। कृषि कानूनों के विरोध में किसान एक महीने से अधिक समय से दिल्ली की सड़कों पर खुले आसमान के नीचे पड़े हैं, लेकिन सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है। सरकार किसानों के बजाय पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है। इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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वहीं, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में इस समय गन्ने की कटाई और उसमें गेहूं की बुवाई का कार्य चल रहा है। किसान अपना काम जैसे-जैसे पूरा कर, कड़ाके की सर्दी में अपने धरनारत किसान साथियों की मदद करने व उनका हौसला बढ़ाने के लिए आंदोलन में शामिल होने गाजीपुर बार्डर जा रहे हैं। सरकार यदि किसानों की मांग मान लेती तो किसानों को इतना परेशान नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा कि जब कृषि कानून किसानों के लिए बना है और उन्हें यह पसंद नहीं तो फिर क्यों सरकार इसे किसानों पर थोंप रही है। सरकार को कानून वापस लेने के साथ ही एमएसपी पर ठोस कानून बनाना होगा। किसानों की मांगों को जब तक नहीं माना जाता वह आंदोलन जारी रखेंगे।
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गाजीपुर बॉर्डर कूच करने वालों में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता मुकुल कुमार त्यागी, चौधरी रामंवीर सिंह, वीरेश चौधरी, वीरपाल सिंह, परमेंद्र सिंह ढिल्लन, मोनू त्यागी, नरेन्द्र सिंह, ज्ञानेंद्र त्यागी, विजय वर्मा, सतबीर प्रधान, हाक्मीन अली मंसूरी, तरुण चौधरी, विनीत त्यागी आदि मौजूद रहे।
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