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दिल्ली में गूंज रही हापुड़ के किसान संगठनों की हुंकार

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दिल्ली में गूंज रही हापुड़ के किसान संगठनों की हुंकार
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हापुड़। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच दिल्ली तक हापुड़ के किसान संगठनों की हुंकार गूंज रही है। खुले आसमान में सर्दी व कोहरे के बीच धरना स्थल पर हुक्कों की गुड़गुड़ाहट और किसान एकता जिंदाबाद के नारों से एक जुटता का संदेश दिया जा रहा है। साथ ही किसानों के हक में आरपार की लड़ाई का एलान किया गया है। जिले से रोजाना बड़ी संख्या में किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। खुले आसमान के नीचे कार्यकर्ता दिनरात गुजार रहे हैं, सड़कों पर ही खाना पकाया जा रहा है।
सरकार द्वारा तीन कृषि कानून बनाए गए हैं, जिसका शुरूआत से ही किसानों ने विरोध किया था। आए दिन किसान संगठन धरना प्रदर्शन, चक्का जाम कर रहे थे। लेकिन उनकी मांगे पूरी नहीं की जा सकी। अब देशभर से किसान इस कानून के विरोध में राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं।
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हापुड़ से भारतीय किसान यूनियन, किसान मजदूर संगठन और भाकियू भानु के कार्यकर्ता रोजाना बड़ी तादात में दिल्ली बॉर्डर पहुंचकर आंदोलन को गति दे रहे हैं। दिनरात खुले आसमान में धरने पर डटे हैं, उनकी मांग सिर्फ तीनों कानून को वापस लेने व एमएसपी का कानून बनाने की है।
इस आंदोलन में हापुड़ के किसानों की एक जुटता खूब रंग ला रही है। सड़कों पर लगे शिविरों में यहां के संगठन पदाधिकारी जमकर किसानों की मांग उठा रहे हैं। हापुड़ के कार्यकर्ताओं के धरने में गुड़गुड़ाते हुक्के और किसान एकता के नारों से यह आंदोलन नई गति पा रहा है। किसानों का जज्बा इतना बढ़ गया है कि सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे वह सरकार को चुनौती दे रहे हैं। कृषि कानूनों को वापस लेने व एमएसपी कानून बनाने के लिए संगठन किसी हद तक भी आंदोलन करने को तैयार हैं।
खाने पीने के लिए सड़कों पर ही भट्टियां सजाई गई हैं। दिल्ली आने जाने वाले कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि गुरुद्वारों से आने वाला लंगर किसानों को राहत पहुंचा रहा है। जिले से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। आंदोलन में हापुड़ से शामिल होने वालों में दिनेश खेड़ा, धनवीर शास्त्री, यशवीर सिंह, जतिन चौधरी, नितिन बाना, दिनेश त्यागी, जीते चौहान, नीलम त्यागी, भगतराम, बबली सिंह, संदीप चौधरी, हबीब चौधरी, सब्बू चौधरी, अयूब अली, मयंक चौहान, महिपाल सिंह, अनिल चौधरी, चंद्रपाल सिंह, नेपाल सिंह, जगवीर सिंह, जमील खान, ताज मोहम्मद समेत सैकड़ों कार्यकर्ता डटे हुए हैं।
--क्या कहते हैं किसान नेता--
भाकियू के मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा ने कहा कि एमएसपी का बाजार में कोई औचित्य नहीं रह गया, क्योंकि इस पर कानून न बनने के कारण बिचौलिया बहुत कम दाम में फसल खरीदते हैं। तीनों कानून किसानों को संकट में डालेंगे। इसके विरोध में आंदोलन जारी रहेगा।--फोटो संख्या--30
भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष धनवीर शास्त्री ने कहा कि सरकार किसानों को अंधेरे में न रखे। बल्कि तीनों काले कानूनों को वापस लेकर, किसान हित में काम करें। देश का किसान आर्थिक संकट में फंसा है, उन्हें निजात दिलाने के बजाय उनका मजाक बनाया जा रहा है।--फोटो संख्या--23
भाकियू भानु के जिलाध्यक्ष पवन हूण ने कहा कि एमएसपी पर कानून नहीं बनने के कारण बाजारों में एमएसपी से बहुत कम दाम पर फसल को खरीदा जाता है। सरकार को इस पर कानूून बनाना चाहिए था, लेकिन नहीं बनाया। सरकार किसान विरोधी है, इसका जवाब उन्हें मिल रहा है।--फोटो संख्या--25
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वरिष्ठ कार्यकर्ता भगतराम ने कहा कि सरकार चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। इसलिए तीन कृषि कानून बनाए गए हैं। अब समय है जब किसानों को अपनी ताकत दिखानी चाहिए। सरकार को तीनों कानून वापस लेने होंगे, तब तक किसान शांत नहीं बैठेंगे।--फोटो संख्या--24
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