काली नदी की सफाई के लिए हापुड़ में होगी जल पंचायत
हापुड़। लोगों के जीवन के लिए काल बन रही काली नदी को साफ करने के लिए अब जल पंचायत होगी। पर्यावरणविद् कृष्णकांत सिंह हूण के नेतृत्व में युवाओं को बड़ी संख्या में जोड़ा जा रहा है। बता दें कि मेरठ को छोड़कर किसी अन्य जिले में कचरा शोधन की व्यवस्था भी नहीं है, सीवरेज का पानी सीधे काली नदी में डाला जाता है। जिसके चलते काली नदी किनारे बसे गांवों का भूगर्भ जल दूषित हो गया है। लोग गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
हापुड़ से गुजरने वाली काली नदी का उद्गम मुजफ्फरनगर के खतौली से हुआ है। यह मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ होते हुए बुलंदशहर, कासगंज से होकर कन्नोज में गंगा नदी में मिल जाती है। इन दिनों यह नदी जिन जिलों से होकर गुजर रही है, वहां कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं। इन रोगों का प्रमुख कारण नदी में धड़ल्ले से गिराया जा रहा सीवरेज, केमिकल युक्त पानी और बॉयो मैटेरियल है। नदी को सर्वाधिक जहरीला मेरठ जिला बना रहा है।
इन गांवों में बरपा रही कहर
काली नदी हापुड़ के गांव असरा, मुरादपुर, मतनौरा, मलकपुर, बिगास, गजालपुर, बाबूगढ़ छावनी, लालपुर, ततारपुर आदि गांवों में जमकर कहर बरपा रही है। यहां बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं।
प्रतिदिन नदी में गिर रहा 390 एमएलडी सीवरेज-
काली नदी में प्रतिदिन सात जिलों का करीब 390 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) सीवरेज गिर रहा है। इसमें मुजफ्फरनगर का 9 एमएलडी, मेरठ का 287 एमएलडी, हापुड़ का 21 एमएलडी, बुलंदशहर का 32 एमएलडी, कासगंज का 32 एमएलडी और कन्नोज का 9.5 एमएलडी सीवरेज नदी में गिर रहा है।
-सिर्फ मेरठ में सीवरेज शोधन की व्यवस्था-
सातों जिलों में से सिर्फ मेरठ में 154 में से 88 सीवरेज में ट्रीटमेंट की व्यवस्था है। हापुड़ समेत अन्य जिलों में सीवरेज ट्रीटमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि हापुड़ में इस दिशा में कार्य प्रगति पर है।
103 औद्योगिक इकाई बिगाड़ रही नदी की सेहत
काली नदी की सेहत बिगाड़ने में हापुड़ समेत सातों जिलों में स्थापित 103 औद्योगिक इकाई से निकलने वाला प्रतिदिन 68 हजार लीटर केमिकल युक्त पानी घातक सिद्ध हो रहा है। इनमें काली नदी में मुजफ्फरनगर की एक शुगर मिल, मेरठ की दो डिस्टलरी, 5 शुगर मिल, 13 पेपर मिल, 46 अन्य औद्योगिक इकाई, गाजियाबाद की एक डिस्टिलरी, एक शुगर मिल, तीन पेपर मिल, 10 अन्य इकाई, हापुड़ की 1 डिस्टिलरी, एक शुगर मिल, दो अन्य इकाई, बुलंदशहर एक डिस्टिलरी, 3 शुगर मिल, चार अन्य इकाई का केमिकल युक्त पानी नदी का स्वास्थ्य बिगाड़ रही है।
एक मिल पर लग चुका है पांच करोड़ का जुर्माना-
पानी को दूषित करने के मामले में हापुड़ की एक शुगर मिल पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है। लेकिन अभी तक इस जुर्माने से वसूली राशि का सही इंतजाम नहीं किया गया है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में की शिकायत
पर्यावरणविद् व जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने बताया कि इस मामले में वह राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत कर चुके हैं। यहां के पानी की बीते दिनों टेस्टिंग भी की गई है। काली नदी से कैंसर जैसी बीमारी फैल रही हैं, अब जिले में वह जल पंचायत अभियान चलाएंगे। इसमें बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाग कर रहे हैं।--फोटो संख्या-20
भौतिक विज्ञान प्रवक्ता अजय मित्तल का कहना है कि सीवरेज शोधन की व्यवस्था न होने के कारण काली नदी का जल जहरीला हो रहा है। सरकार को सीवरेज शोधन की व्यवस्था शुरू करानी चाहिए, ताकि काली नदी को बचाया जा सके। इस तरह के जल में जलीय जीवों का जीवन भी खतरे में पड़ सकता है।--फोटो संख्या--21