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फेक्टरी का लाइसेंस दिलाने के नाम पर हड़पे 5.5 करोड़

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फैक्टरी का लाइसेंस दिलाने के नाम पर हड़पे 5.5 करोड़
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हापुड़। फैक्टरी का लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति ने सपा के पूर्व मंत्री के नाम पर पांच करोड़ 50 हजार रुपये हड़प लिए। बार-बार तगादा और समझौता करने के बावजूद भी धनराशि वापस नहीं दी गई। आरोप है कि रुपये मांगने पर पुत्र का अपहरण करने और जान से मारने की धमकी भी दी गई। वहीं दूसरे पक्ष ने भी प्लाटिंग में कमीशन के रूप में दी जाने वाली धनराशि एेंठने और मांगने पर घर में घुसकर जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
बुलंदशहर आवास विकास निवासी शाहिद अली कुुरैशी का कहना है कि कुछ वर्ष पहले डासना और मुरादाबाद में उसकी फैक्टरियों का निर्माण हो रहा था। इनके लिए उसे लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाण की आवश्यकता थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात मजीदपुरा निवासी बाबू खां से हुई। बाबू खां ने उसे भरोसा दिलाया कि उसकी जान पहचान सरकार में अच्छी खासी है। कहा कि वह पूर्व मंत्री के माध्यम से वह उसे लाइसेंस आदि दिलवा देगा। आरोपी के झांसे में आकर उसने बाबू को लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए 5.5 करोड़ रुपये दे दिए, लेकिन इसके बाद बाबू खां ने न तो लाइसेंस दिलवाया और न ही रुपये वापस किए। वहीं तगादा करने पर आरोप ने उसके पुत्र का अपहरण करने और परिवार को जान से मारने की धमकी दी। जिसके बाद पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
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उधर बाबू खां ने भी शाहिद पर आरोप लगाया है कि उसने उसे 677 कच्चा बीघा भूमि दिलवाई थी और विक्रय होने पर उसे 50 हजार रुपये प्रति बीघा का कमीशन दिया जाना था, लेकिन उसने उसे कमीशन नहीं दिया है। मांगने पर 21 अगस्त को शाहिद अपने पांच साथियों के साथ उसने घर में घुस आया और रिवाल्वर से फायर कर दिया। मारपीट करते हुए आरोपी फरार हो गए।
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पूर्व मंत्री से बताये थे घनिष्ठ संबंध -
साढ़े पांच करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पीड़ित शाहिद का कहना है कि आरोपी ने पूर्व मंत्री से अपने घनिष्ठ संबंधों का हवाला देकर उससे रकम ऐंठी थी। रकम लौटाने की मांग के दौरान उसका बाबू खां से समझौता भी हो गया था। जिसमें उसने 50 लाख रुपये विभिन्न विभागों में लेनदेन में खर्च होने की बात कही थी। इसके बाद बाकी रकम में दो करोड़ 75 लाख रुपये जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 के बीच देेने का लिखित में वादा किया था। कुल मिलाकर रकम को किस्तों में दिए जाने पर दोनों पक्षों में समझौता हुआ था। लेकिन इसके बावजूद आरोपी समझौते से मुकर गया। पीड़ित ने इस मामले में आरोपी बाबू खां द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे को भी फर्जी बताया है। उसका कहना है कि दबाव बनाने के लिए यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है।
कोट
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सक्सेना का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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