मीट व्यवसायी भाईयों की फैक्टरी व मकान पर ईडी का छापा
हापुड़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बुधवार को नगर के मुख्य मीट कारोबारी दो भाईयों की मीट फैक्टरी और मकान पर एक साथ छापा मारा। टीम ने फैक्टरी और मकान से दस्तावेज और कई मोबाइल फोन जब्त करते हुए घंटो पूछताछ की। बताया जा रहा है कि आय से अधिक संपत्ति को लेकर ईडी द्वारा कार्रवाई की गई है। दस्तावेज और सुबूत जुटाने के बाद टीम लौट गई। इस दौरान दोनों स्थानों पर भारी पुलिस बल मौजूद रहा और जिले के अन्य कारोबारियों में भी दहशत की स्थिति रही।
मोहल्ला गद्दापाड़ा निवासी दो कारोबारी भाईयों के घर पर बुधवार सुबह करीब 10 बजे अचानक भारी पुलिस बल के साथ प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छापा मारा। पुलिस बल के साथ ईडी की टीम मकान के अंदर चली गई। वहीं स्थानीय पुलिस ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। टीम ने मकान में किसी के भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा इसी समय ईडी की दूसरी टीम ने पुलिस बल के साथ रामपुर रोड स्थित इनकी मीट फैक्टरी पर भी छापा मारा। टीम ने फैक्टरी के अंदर पहुंचकर सभी दरवाजों को बंद करा दिया। दोनों स्थानों पर टीम शाम तक दस्तावेजों को खंगालती रही। टीम दोनों स्थानों से काफी दस्तावेज व अभिलेख सील कर अपने साथ ले गई है। ईडी के छापे की सूचना पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। दिनभर लोगों में ईडी के छापे को लेकर चर्चाएं होती रहीं। इस दौरान करीब छह घंटे तक टीम मामले को लेकर पूछताछ करती रही। स्थानीय पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई। हालांकि चर्चा रही कि टीम बैंक खातों की डिटेल के साथ साथ आय से अधिक संपत्ति के संबंध में दस्तावेज जुटाकर साथ ले गई है। करीब छह बजे टीम यहां से वापस लौट गई। उधर मीट कारोबारी के फैक्टरी और आवास पर ईडी की टीम के छापे के बाद नगर के अन्य मीट कारोबारियों की धड़कन तेज रही।
इस संबंध में एएसपी सर्वेश कुमार मिश्रा का कहना है कि ईडी की टीम ने मीट कारोबारी के मकान और फैक्टरी पर छापा मारा है। इस संबंध में स्थानीय पुलिस से केवल फोर्स मांगी गई थी। जिसे उपलब्ध करा दिया, इसके अलावा किस संबंध में छापा मारा गया है। इसकी जानकारी नहीं है।
हाल मे ही चालू हुआ है मीट प्लांट
- प्रदेश सरकार द्वारा अवैध मीट कटान को रोकने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान प्लांट को बंद करा दिया गया था। करीब दो वर्ष से अधिक समय तक बंद रहने के बाद हाल ही में प्लांट को चालू किया गया था। मीट प्लांट को चालू होने के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस दौरान काफी वित्तीय अनियमितताएं बरती गई हैं।