सरावनी में जन सहयोग से नाले पर बनेगा पुल
हापुड़। गांव सरावनी में नाले पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई किलोमीटर चलकर उस पार के खेतों में जाना पड़ता है। इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन राहत नहीं मिली है। अब जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत ने गांव में पंचायत कर जन सहयोग से नाले पर पुल बनाने का निर्णय लिया है, इसमें ग्राम प्रधान भी सहयोग करेंगे।
छोईया, काली नदी किनारे बसे गांवों में ग्रामीणों को सबसे बड़ी समस्या नदी पार करने में आती है। वजह वहां पुल नहीं होते है। जिले प्रशासन से शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिलने पर क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने बीते दिनों गांव गजालपुर में काली नदी और गोहरा में छोईया नाले पर जन सहयोग से पुल बनवाया था। इससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली थी।
सरावनी में भी इस तरह की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत सिंह ने गांव में पंचायत कर, लोगों की समस्या सुनी और सरावनी में किठौर ड्रेन पर पुलिया का निर्माण कराने का निर्णय लिया है।
पंचायत में ग्रामीणों ने बताया खेत नाले के दूसरी ओर हैं यदि वह मुख्य मार्ग से जाते हैं उन्हें 2 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, उस मार्ग से खेत पर जाने के लिए चकरोड नहीं है। दूसरे किसान का खेत खाली होने पर ही वह अपनी भैंसा बुग्गी अथवा ट्रैक्टर आदि ले जा पाते हैं। जिसके चलते खेतों की जुताई समय पर नहीं हो पाती न ही फसल की ढुलाई कर पाते हैं। इसलिए मजबूरी में वह जुगाड़ करके नाले पर आवागमन के लिए रखे गए सीमेंट के खंभों के सहारे प्रतिदिन अपने खेतों का काम करते हैं।
गन्ने की पुलिया व पशुओं का चारा विगत 40 वर्षों से सिर पर ढोने को मजबूर हैं। कई बार महिलाएं बच्चे इन खंभों पर से फिसल कर गिर जाते हैं। अनेक वर्षों से जनप्रतिनिधियों से यहां पुलिया की मांग की जाती रही है, लेकिन आज तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली।
कृष्णकांत सिंह ने इस बाबत सिंचाई विभाग की शाखा अनूपशहर, खंड मेरठ के अधिशासी अभियंता शेर सिंह से भी बात की। उन्होंने धन अनुपलब्धता का हवाला देकर पुलिया निर्माण में असमर्थता जताई हैं। जिस कारण व्यापक जनहित को देखते हुए स्वयं पुलिया निर्माण का फैसला लिया है। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि मोमिन प्रधान ने भी इस कार्य में मदद का आश्वासन दिया है।