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हापुड़ में प्रदूषण का खतरनाक स्तर बरकार

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खतरनाक स्तर पर प्रदूषण का स्तर, स्कूलों में छुट्टी की मांग
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हापुड़। जिले का प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है। शुक्रवार को वातावरण में हल्की धूप जरूर रही, लेकिन प्रदूषण लोगों को परेशान करता रहा। एक्यूआई 471 दर्ज किया गया। जबकि पीएम-10 का स्तर 444 और पीएम 2.5 कर स्तर 470 दर्ज किया गया। उधर, जमीनी स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों के दिखावे को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है।
पिछले कुछ दिनों से हापुड़ में प्रदूषण के मामले में कुछ चुनिंदा शहरों की श्रेणी में है। शुक्रवार को भी प्रदूषण के ये हालात जारी रहे। जिले का एक्यूआई का स्तर 471 दर्ज किया गया। जो बेहद ही खतरनाक है। इस स्तर को देखकर कहा जा सकता है कि जिले का वातावरण खतरनाक गैसों का चैंबर बना हुआ है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद ही खतरनाक है। सबसे बड़ी बात है रोगियों के लिए प्रदूषण का यह स्तर और भी अधिक खतरनाक है।
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इस स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए प्रयास करने के लिए निर्देशित किया गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि जमीनी स्तर पर कहीं भी ऐसे प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
लोग घरों के आसपास करें पानी का छिड़काव
- प्रदूषण विभाग के स्टेशन इंचार्ज सलमान राणा का कहना है कि प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा। खुले में निर्माण सामग्री न डाले और फिलहाल किसी प्रकार का निर्माण कार्य न करें। अपने घरों के आसपास और पेड़ों आदि पर छिड़काव करते रहें।-फोटो-22
जमीनी स्तर पर नहीं किए जा रहे प्रयास
- डा. एसपी सिंह का कहते हैं कि सरकार हर मामले में विफल हो चुकी है। यह हर बार की समस्या है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए केवल कागजों पर ही प्रयास किए जाते हैं, जमीनी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिससे हालात और गंभीर हो रहे हैं।-फोटो-23
श्याम कुमार आढ़ती का कहना है कि नगर पालिका हो या दूसरे विभाग इस मामले में खानापूर्ति बरत रहे हैं। ना कहीं छिड़काव ही दिखाई दे रहा है और न ही किसी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक दिखायी दे रही है। ऐसी स्थिति में सरकार ही इस प्रकार के प्रदूषण को बढ़ावा देे रही है।-फोटो -21
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मुकुल त्यागी का कहना है कि प्रदूषण ही चपेट में शहर ही नहीं गांव भी आ गये हैं। यह सोचने का विषय है कि प्रदूषण की जद में हमारे गांव भी हैं। ऐसे में क्षेत्र का हवा सांस लेने लायक नहीं बची है। इसके लिए सरकार और हम दोनों ही जिम्मेदार हैं।-फोटो-24
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