सबसे पहले हापुड़ पहुंचे खीरी जिले के कांवड़िये
हापुड़। शिव भक्त कांवड़ियों का पहला जत्था हापुड़ जिले में 16 जुलाई को गोमुख से पहुंचा था। इस जत्थे में शामिल चार कांवड़ियां लखीमपुर जिले के हैं जो 807 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर श्रावण मास के अंतिम सोमवार 12 अगस्त को उज्जैन के महाकाल मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।
इन कांवड़ियों ने मेरठ रोड पर ग्लेक्सी गार्डन में कांवड़ियों की सेवा के लिए लगे शिविर के पहले ही दिन वहां विश्राम किया था। उन्होंने बताया था कि लखीमपुर जिले के गांव बांची निवासी भोले भक्त महेश मिश्रा के नेतृत्व में अंशुल तिवारी, अमर मिश्रा, अर्जुन मिश्रा ने एक जुलाई को गोमुख से पवित्र गंगा जल की कांवड़ उठाईं थीं। तब से लोग पैदल ही कांवड़ लेकर 16 जुलाई को हापुड़ पहुंचे थे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर विश्राम किया।
महेश मिश्रा ने शनिवार की शाम को बात करने पर बताया कि वह मंडावर राजस्थान पहुंचे हैं। अभी जयपुर के रास्ते होकर 12 अगस्त को महाकाल मंदिर उज्जैन पहुंचकर श्रावण मास के अंतिम सोमवार को जलाभिषेक करेंगे।
उन्होंने कहा कि हापुड़ के शिविर में चारों कांवड़ियों की सेवा तथा बेहतर उपचार किया गया। महेश मिश्रा का कहना था कि वह दूसरी बार गोमुख से उज्जैन के महाकाल मंदिर में पवित्र गंगाजल की कांवड़ का जलाभिषेक करने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं।
गूगल के अनुसार गौमुख से उज्जैन तक का सफर करीब 807 किलोमीटर पड़ता है जिसे पैदल तय करना बेहद जटिल हैं। इस सफर को तय करने के लिए कांवडिय़ां बम बम भोले का शंखनाद कर आगे बढ़ते रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि हापुड़ के ग्लेक्सी गार्डन में सेवा शिविर के संयोजक दिनेश शर्मा का दावा है कि 16 जुलाई से अब तक करीब 750 कांवडिय़ां दूसरे जिलों के हापुड़ होकर गुजरे और उनके शिविर में ठहरे हैं। वह वहां ठहरने वाले कांवड़ियों के मोबाइल नंबर और पते जरूर नोट कराते हैं।
उनका सहयोग करने वालों में बॉबी पाठक, संजय त्यागी, विनय त्यागी, अमर, राजेन्द्र, विकास त्यागी आदि का कहना है कि कांवड़ियों की सेवा करने से आत्मिक शांति मिलती है।