गोआश्रय मामले में अनियमितता पर नपे चार अधिकारी
हापुड़। गोवंशों के मामले में लापरवाही बरतने पर डीएम ने सख्त रुख अपनाया है। एसडीएम हापुड़ और गढ़ द्वारा जांच के बाद इस मामले में लापरवाही बरतने पर गढ़ ईओ और हापुड़ बीडीओ सहित चार अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी करते हुए कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की गई है।
10 जुलाई को गांव नली के प्रधान व अन्य ग्रामीणों की ओर गोवंशों को बछलौता नहर की पटरी पर छोड़ दिया गया था। इसके लेकर जमकर हंगामा हुआ था। पुलिस ने तीन कैंटर को पकड़ लिया था। अगले दिन ग्रामीणों ने छोड़े गए गोवंशों को गोआश्रय स्थल भेजे जाने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन भी किया था। लेकिन इस मामले में डीएम के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों ने गोवंशों को गोआश्रय स्थल नहीं पहुंचाया। इसके बाद रविवार को डीएम अदिति सिंह ने एसडीएम सत्यप्रकाश को जांच के आदेश दिए थे। आदेश के बाद एसडीएम ने बछलौता और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि जो गोवंश चार दिन पहले नहर की पटरी पर छोड़े गए थे, वे इधर उधर घूमते पाये गए। पकड़े गए गोवंशों को भी गांव में छुड़वा दिया गया। मामले की रिपोर्ट एसडीएम ने डीएम को सौंपी। इसके अलावा गोवंश की मौत के मामले में एसडीएम गढ़ ने नक्काकुआं स्थित गोआश्रय केंद्र का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि 12 जुलाई 2019 की रात्रि को सड़क पर घूम रहे पशु की दुर्घटना के कारण मौत हो गई थी। जोकि गोआश्रय स्थल का गोवंश नहीं था। हालांकि निरीक्षण के दौरान गो आश्रय स्थल में कीचड़ एवं रख रखाव की व्यवस्था ठीक ना होने के कारण गोवंश बीमार पाये गए। एसडीएम गढ़ द्वारा भी डीएम को रिपोर्ट सौंपी गयी। एसडीएम गढ़ और हापुड़ की रिपोर्ट के आधार पर रविवार शाम डीएम ने आश्रय स्थल की व्यवस्था ठीक न पाए जाने पर अधिशासी अधिकारी गढ़मुक्तेश्वर अमिता, सफाई निरीक्षक सुभाष सिंह के अलावा लापरवाही बरतने व उच्चाधिकारियों को गलत रिपोर्ट देने के मामले में खंड विकास अधिकारी निशांत पांडे और पशु चिकित्सा अधिकारी बाबूगढ़ कृष्णकांत नागर के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की है। चोरों अधिकारियों के खिलाफ शासन से कार्रवाई करने की संस्तुति भी की गयी है।