तीन तलाक के मुकदमे में फैसला न करने पर किया सामाजिक बहिष्कार
गढ़मुक्तेश्वर। नगर में एक समुदाय के लोगों ने महिला और उसके परिजनों द्वारा तीन तलाक का मुकदमा वापस न लेने पर पंचायत बुलाई, जिसमें परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान सुना दिया। वहीं इन लोगों की मदद करने वालों पर भी 51सौ रुपये जुर्माना लगाने की घोषणा की गई। इस संबंध में पीड़ित पक्ष ने एसपी, मानवाधिकार आयोग को पत्र भेज कार्रवाई की मांग की है।
नगर के एक मोहल्ला निवासी व्यक्ति ने बताया कि पड़ोस में रहने वाली एक युवती का निकाह मोहल्ले के ही युवक के साथ हुआ था। लेकिन युवती के पति ने अपने परिवार जनों के उकसाने पर उसे तीन तलाक दे दिया। जिसके बाद युवती अपने मायके में रहने लगी। शिकायतकर्ता का कहना है कि पीड़िता ने पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ गढ़ न्यायालय में तीन तलाक को लेकर वाद दायर किया हुआ है। जिसे लेकर ससुराल पक्ष व उनके रिश्तेदार लगातार पीड़ित पक्ष पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। पीड़िता व उसके परिवार ने मुकदमा वापस लेने से इनकार कर दिया। जिसे लेकर आरोपियों ने बिरादरी की पंचायत बुलाई। जिसमें पीड़िता व उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला सुना दिया गया। वहीं यह भी निर्णय दिया गया कि यदि बिरादरी का कोई व्यक्ति पीड़ित परिवार की मदद करेगा, तो उस पर भी 51 सौ रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। जिसका विरोध करने पर आरोपियों ने उसके साथ भी अभद्रता व गाली गलौज की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि बिरादरी के लोगों की पंचायत में सुनाया गया फरमान भारतीय संविधान और मानवाधिकारों के खिलाफ है। शिकायतकर्ता ने शिकायती पत्र भेजते हुए मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। संवाद