दो माह में 30 फीसदी ही रह गया गढ़ का मूढ़ा कारोबार
गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले 60 दिनों में गढ़ क्षेत्र के कुटीर उद्योग मूढ़ा कारोबार पर भी विपरीत असर पड़ा है। कोरोना कर्फ्यू के चलते बाहरी लोगों का आवगमन बंद होने और निर्यात रुकने से कारोबार में 70 फीसदी तक कमी आई है। जिसके चलते मूढ़े बनाकर जीविका चलाने वाले 150 से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। वहीं कच्चे माल की अनुपलब्धता के चलते भी मूढ़े तैयार करने में परेशानी आ रही है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने नगर के मूढ़ा कारोबार को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान गढ़-ब्रजघाट में बाहरी श्रद्धालुओं का आगमन भी बंद हो गया, वहीं हाईवे पर भी राहगीरों की संख्या में काफी कमी आई है। जिसके चलते हाईवे पर रूक कर मूढ़े खरीदने वाले लोग भी इक्का-दुक्का ही रह गए हैं। पहले नगर में करीब दो करोड़ रुपये प्रतिमाह का कारोबार था, जो मई के महीने में दस लाख तक सिमट गया। कोरोना कर्फ्यू हटने के बाद भी श्रद्धालुओं का आगमन अभी शुरू नहीं हुआ है।
150 से अधिक परिवार जुड़े हैं मूढ़े बनाने में
नगर के मोहल्ला आहता बस्तीराम में 150 से अधिक परिवार के लोग अपने घरों में मूढ़ा बनाने का काम करते हैं। परिवार के छोटे-बड़े सभी लोग इस काम में अपना सहयोग देते हैं। जिससे उनके परिवारों की रोजी-रोटी चलती है।
विदेशों में भी होता है निर्यात
गंगानगरी गढ़ में बनने वाला मूढ़ा बड़े कारोबारियों (निर्यातकों) के माध्यम से अमेरिका, इटली, ब्राजील, स्पेन, जापान, फ्रांस समेत दस देशों में निर्यात किया जाता है। कारीगर मूढ़े तैयार कर निर्यातकों को बेचते है, जिससे उनकी रोजी-रोटी सही ढंग से चलती है।
बाहरी लोगों के नहीं आने और निर्यात बंद होने से बढ़ी परेशानी
गंगानगरी गढ़-ब्रजघाट में दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा प्रदेशों समेत अन्य महानगरों व जनपदों के श्रद्धालुओं का आगमन बड़ी संख्या में होता है। जिनमें से काफी लोग हाईवे किनारे अस्थाई दुकानों पर बिकने वाले मूढ़े भी खरीदते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते गंगा स्नान पर रोक लगने पर केवल अस्थि विजर्सन को ही बाहरी लोग पहुंच रहे हैं। जिससे फुटकर खरीदारी लगभग बंद हो गई है। वहीं बाहरी देशों को निर्यात भी फिलहाल बंद पड़ा है। जिससे संकट बढ़ गया है।
क्या कहते हैं मूढ़ा व्यवसाई
बिक्री घटने से परेशानी हो रही
कोरोना संक्रमण के कारण कच्चा माल भी काफी कम मिल पा रहा है, जिससे मूढ़े तैयार करने में दिक्कत आ रही हैं। खरीदारों के अभाव में तैयार माल भी ज्यों का त्यों रखा है। पहले दिन में बिक्री घटने से परेशानी झेलनी पड़ रही है।-खजान सिंह
निर्यातक भी नहीं खरीद रहे माल
पहले कच्चा माल खादर क्षेत्र में बहुतायात से मिल जाता था, लेकिन अब बाहर से मगाना पड़ता है। वहीं संक्रमण के इस दौर में खरीदार नहीं मिल रहे। दिल्ली-मुरादाबाद के निर्यातक भी माल नहीं खरीद रहे हैं। जिससे परिवार के पालन-पोषण का संकट गहरा गया है।-रमेश सिंह
निर्यात बंद होने से गोदामों में पड़ा है माल
कोरोना संक्रमण बाहरी देशों में भी फैला हुआ है, जिससे निर्यात बंद सा हो गया है। पहले से खरीदा हुआ माल भी गोदामों में पड़ा है। निर्यात में 70 फीसदी तक कमी आई है। जिसके चलते नया माल खरीदने में परेशानी आ रही है।-सुशील, निर्यातक