अधिवक्ताओं ने फूंका एसडीएम और तहसीलदार का पुतला, रखी हड़ताल
गढ़मुक्तेश्वर। अधिवक्ताओं ने मंगलवार को तहसील मुख्यालय पर नारेबाजी कर एसडीएम और तहसीलदार का पुतला फूंका। इस दौरान अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार के तबादले की मांग भी उठाई। सब रजिस्ट्रार कार्यालय में तालाबंदी दूसरे दिन भी जारी रखी। वहीं गढ़ बार एसोसिएशन ने बार एसोसिएशन का समर्थन कर दोनों न्यायालयों का बहिष्कार किया। अधिवक्ताओं की हड़ताल से लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर के अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने शनिवार को एसडीएम विजयवर्धन तोमर पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर दिया था। वहीं सोमवार को भी बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर के अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार जारी रखते हुए सब रजिस्ट्री कार्यालय में भी तालाबंदी कर दी थी। इस संबंध में मंगलवार को बार हाल में बार एसोशिएशन गढ़मुक्तेश्वर और गढ़ बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें गढ़ बार अध्यक्ष चौधरी अशरफ अली और सचिव अनिल कुमार गौतम ने कहा कि एसडीएम विजयवर्धन तोमर व तहसीलदार सुरेंद्र सिंह द्वारा 151 सीआरपीसी के चालान में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। बैठक में अधिवक्ता के साथ किए गए दुर्व्यवहार पर भी रोष व्यक्त किया गया। इस दौरान गढ़ बार एसोसिएशन भी दूसरे गुट को समर्थन देते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की। वहीं दोनों गुटों के अधिवक्ता तहसील मुख्यालय पर एकत्र हुए। जिन्होंने एसडीएम और तहसीलदार का पुतला फूंकते हुए जमकर नारेबाजी की। वहीं अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार का तबादला न होने तक दोनों न्यायालयों का बहिष्कार और सब रजिस्ट्री कार्यालय में तालाबंदी जारी रखने की चेतावनी दी।
इस मौके पर शाकिर अली, मोहित गुप्ता, अमित गर्ग, सीएस यादव, आनंद भाटी, महताब चौधरी, दीपक कुमार, इंतजार, सचिन शर्मा, नरेंद्र कुमार, धमेंद्र सिंह, जितेंद्र भाटी, सत्यप्रकाश चौहान, राजकुंवर चौहान, अवनीश चौधरी, सुहैल आलम, विकास गुप्ता, मिलिन कुमार, हेमंत गौड़, राज जयंत, प्रदीप कुमार निषाद, ब्रजभूषण गर्ग, जुनैद अहमद, खालिद, वीरेंद्र कुमार अग्रवाल समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
कोट
एसडीएम विजयवर्धन तोमर का कहना है कि उन्होंने दोषी पक्ष के लोगों को ही 151 के तहत जेल भेजा। पीड़ित पक्ष के लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई है। कहा कि अभद्रता का आरोप बेबुनियाद है। यदि अधिवक्ताओं को कोई गलतफहमी हुई है, तो उसे वार्ता से सुलझाया जा सकता है।