खादर के जंगलों में चल रहा अवैध शराब का खेल
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ गंगा खादर क्षेत्र में अवैध शराब बनाने का काम कुटीर उद्योग के रूप में जड़े जमा चुका है। कार्रवाई के दौरान अधिकांश लोग पुलिस की गिरफ्त से बच निकलते हैं। यूरिया, ऑक्सीटोसिन और थिनर मिलाकर इस शराब को कुछ देर में ही तैयार कर लिया जाता है। यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसे पीकर बीते वर्षों में कई लोगों की मौत हो चुकी है।
जनपद मेरठ के जानी क्षेत्र के मीरापुर जखेड़ा गांव में जहरीली शराब के सेवन से बुधवार की रात दो लोगों की मौत हो गई है। वर्ष 2019 में होली से पहले रुड़की, सहारनपुर और कुशीनगर में शराब के सेवन से तीन दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। आबकारी विभाग द्वारा बड़ी कार्रवाई न हो पाने के चलते शराब माफिया लगातार सक्रिय हैं। गंगा खादर क्षेत्र समेत अन्य स्थानों पर बन रही शराब सरकारी राजस्व को चूना लगने के साथ ही सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। जिसे गुड़ और शीरे से तैयार किया जाता है। इसे अधिक नशीला बनाने के लिए इसमें यूरिया और कभी-कभी ऑक्सीटोसिन मिला दिया जाता है। कई बार इसमें नींद की गोलियां भी मिलाई जाती हैं, जिससे शराब के जहरीले होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं बिना किसी सावधानी बनने वाली इस शराब की तीव्रता का भी कोई मानक नहीं होता। जिससे यह पीने वालों के लिए मौत का सामान बन सकती है।
कार्तिक पूर्णिमा और होली के दौरान बढ़ जाती है मांग
- कच्ची शराब की भट्ठी हर सीजन में धुआं उगलती रहती हैं, लेकिन होली और कार्तिक पूर्णिमा मेले के साथ ही चुनावों के दौर में शराब बनाने के काम में तेजी आ जाती है। वही इस बार कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन में शराब की दुकानें बंद होने का भी शराब बनाने और बेचने वालों ने जमकर फायदा उठाया है।
गढ़ क्षेत्र में भी तबाही मचा चुकी है जहरीली शराब
- मार्च 2009 में होली के मौके पर थिनर से तैयार की गई शराब ने बहादुरगढ़ के गांव कनौर में सात लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। वहीं जहरीली शराब से मौत होने का सिलसिला क्षेत्र के नानपुर, शरीकपुर, डिबाई, खुड़लिया, देवली, ढाना समेत कई गांवों तक पहुंच गया था। जिससे क्षेत्र में 24 घंटों के भीतर कुल 32 लोगों की मौत हुई, जबकि सौ से भी अधिक लोगों को कई दिनों तक दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा के अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे।
कोट
आबकारी निरीक्षक सीमा कुमारी का कहना है कि अवैध शराब की रोकथाम के लिए लगातार दबिश दी जाती है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के कारण गांवों और जंगलों में जलभराव हो रहा था। इस कारण दबिश डालना संभव नहीं हो पा रहा था। जल्द ही विशेष टीम गठित कर खादर क्षेत्र के जंगलों में छापा मारकर कार्रवाई की जाएगी।