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श्राद्ध पूर्णिमा आज, ब्रजघाट गंगा पर नहीं होगा स्नान

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श्राद्ध पूर्णिमा आज, ब्रजघाट गंगा पर नहीं होगा स्नान
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गढ़मुक्तेश्वर। श्राद्ध पूर्णिमा बुधवार को है। कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने ब्रजघाट में गंगा स्नान प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं श्राद्ध और पिंडदान पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। गंगानगरी के सभी मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। वहीं हाईवे सहित मुख्य रास्तों और चौराहों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
श्राद्ध पूर्णिमा की हिंदू धर्म में बड़ी मान्यता है। श्राद्ध पूर्णिमा से कनागत आरंभ हो जाते हैं, जिसमें हिंदू धर्म के लोग अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए हवन, पिंडदान समेत अन्य धार्मिक कर्मकांड करते हैं। जिसमें गंगा तट पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है। गंगानगरी ब्रजघाट में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत विभिन्न प्रांतों और वेस्टर्न यूपी के कई जनपदों के लोग गंगानगरी ब्रजघाट पहुंचकर पिंडदान समेत विभिन्न धार्मिक कर्मकांड करने के साथ ही दान-पुण्य भी करते हैं। बुधवार से श्राद्ध पूर्णिमा के साथ ही श्राद्ध पक्ष आरंभ हो रहा है। जो 17 सितंबर तक चलेगा।
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लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार श्राद्ध पूर्णिमा समेत कनागत पक्ष में गंगानगरी ब्रजघाट में गंगा स्नान और धार्मिक कर्मकांड पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिसके चलते लोगों को अपने घरों में ही रहकर श्राद्ध कर्म के साथ पिंडदान करना होगा।
कोट
एसडीएम विजयवर्धन तोमर और सीओ पवन कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार गंगा स्नान पूरी तरह प्रतिबंधित है। कहा कि ब्रजघाट में डेरा डाले हुई पीएसी की बटालियन के 11 जवानों समेत अन्य लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। जिसके चलते ब्रजघाट का काफी हिस्सा सील है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूर्णिमा, श्राद्ध पक्ष समेत अमावस्या पर भी गंगा स्नान समेत अन्य घाटों पर धार्मिक कर्मकांड और पूजा-अर्चना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। जिसके लिए गंगानगरी के सभी मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कराई जा रही है। हाईवे समेत मुख्य रास्तों, चौराहों और गंगा तट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जिन्हें ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।
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घर पर भी कर सकते हैं तर्पण
- ज्योतिषाचार्य पंडित उमेश सेनरा ने बताया कि लोग अपने घरों में ही तर्पण कर सकते हैं। घर में किए गए श्राद्ध का फल तीर्थ स्थल पर किए गए श्राद्ध से आठ गुना मिलता है। बताया कि जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ है, पितृ पक्ष की उसी तिथि को सूर्योदय से लेकर दोपहर के बीच उनका श्राद्ध करें। भोजन के लिए ब्राह्मण न मिलने पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति या गायों को भोजन दान करें। घर पर भगवान सूर्य को ही पंडित मानकर पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान करें।
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