खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा टला, ग्रामीणों को चारे की हुई किल्लत
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में अब फिर से गिरावट का सिलसिला जारी रहने से प्रशासन और खादर क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा कम होने लगा है। लेकिन अभी भी पानी भरा होने से ग्रामीणों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
बढ़ोतरी के बाद अब दोबारा से गंगा के जलस्तर में कमी होना शुरू हो गया है। शनिवार व रविवार के बाद सोमवार को भी जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। पांच सेंटीमीटर नीचे गिरकर सोमवार को ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर 198.46 मीटर(समुद्र तल से) दर्ज किया गया। जलस्तर में गिरावट होने से गंगा का रौद्र रूप कम होने लगा है। जिसके चलते ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत महसूस की है। लेकिन अभी भी खादर क्षेत्र के गांवों में आबादी के निकट और जंगल में भरा पानी कम नहीं हो रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही। ग्रामीण महकार, दिनेश, सुरेश, हिम्मत, राजू, महेश का कहना है कि खेतों और जंगलों में भरा पानी कम नहीं होने से अभी भी उनके सामने पशुओं के लिए चारा लाने की समस्या बनी हुई है। वहीं आबादी के आसपास पानी भरने से बीमारियों के फैलने का भी खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करने के लिए बांगर क्षेत्र समेत दूर के गांवों के जंगल में जाना पड़ रहा है। वहीं सही ढंग से चारा नहीं मिलने से दूध का उत्पादन भी कम हो रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों के अनुसार सोमवार की शाम तक ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर 198.46 मीटर दर्ज किया गया। बिजनौर बैराज से सोमवार को भी करीब 48 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे गंगा के जल स्तर पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
तहसीलदार सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जलस्तर कम होने से बाढ़ का खतरा टल गया है। गांवों में टीम भेजकर दवाइयों के छिड़काव के साथ ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगेे। ग्रामीणों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।