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जलस्तर में उतार-चढ़ाव से बाढ़ की संभावना बनी हुई

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गढ़ खादर क्षेत्र में जल स्तर घटने के बाद खेतो में भरा पानी। - फोटो : GARH
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बिजनौर बैराज से छोड़े गए पानी से बढ़ा जलस्तर, ग्रामीणों में दहशत
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में शनिवार को चार सेमी की बढ़ोतरी हो गई। बीते दिनों बिजनौर बैराज से पानी छोडे़े जाने के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। वहीं बिजनौर बैराज से अभी और पानी छोड़े जाने की संभावना है। इससे जलस्तर में और बढ़ोतरी होगी। इधर जलस्तर बढ़ने के साथ जंगल और आबादी के पास लगातार जलभराव हो रहा है। जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।
मानसून गुजरने के बाद भी पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला न थमने के चलते गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में करीब एक माह से गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। बारिश हलकी पड़ने और बैराज से कम पानी छोड़े जाने पर जलस्तर में गिरावट आती है, तो वहीं बारिश शुरू होते ही बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला भी बढ़ जाता है। जिससे गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होना शुरू हो जाता है। शनिवार की सुबह ब्रजघाट में गंगा जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की गिरावट हुई, जिससे जलस्तर 198.57 मीटर(समुद्र तल से) पहुंच गया, लेकिन बिजनौर बैराज से छोड़ा गया 74 हजार 773 क्यूसेक पानी पहुंचने पर जलस्तर फिर से बढ़कर 198.61 मीटर के निशान पर पहुंच गया।
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बिजनौर बैराज से 58 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया
- केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों के अनुसार ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर शनिवार को 198.61 मीटर दर्ज किया गया। वहीं शनिवार को भी बिजनौर बैराज से 58हजार 612 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जो रविवार की दोपहर गढ़ क्षेत्र में पहुंच जाएगा। हालांकि इस पानी के पहुंचने से जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी होगी।
चारे और पेयजल की किल्लत झेलनी पड़ रही
- गंगा का पानी खेतों समेत आबादी के निकट तक पहुंचने के चलते ग्रामीणों और किसानों के सामने खेतों में खड़ा चारा काटने की समस्या उत्पन्न हो चुकी है। ग्रामीणों को बाहरी क्षेत्रों के जंगलों से चारा लाना पड़ रहा है। वहीं खादर के गांवों के हैंडपंप भी दूषित पानी उगल रहे हैं। जिसके चलते इस समय ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पेयजल की है। दूषित पानी के सेवन के चलते ग्रामीणों में बीमारियों का अंदेशा भी बना हुआ है।
पलायन की आशंका बन रही
- जलस्तर में गिरावट के बाद दोबारा बढ़ोतरी का सिलसिला चालू होने से ग्रामीण एक बार फिर चिंतित हैं। ग्रामीण रामरतन, नरेश, महकार, कलुआ, जितेंद्र, मोहन, गणेश का कहना है कि यदि इसी तरह जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही, तो गांवों में बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाएगी। जिसके चलते उन्हें अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ेगा। ऐसे में पशुओं और अनाज की सुरक्षा ग्रामीणों के सामने चुनौती बन रही है।
कोट
तहसीलदार सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी दूर है। फिलहाल बाढ़ की कोई संभावना नहीं हैं, लेकिन तहसील में बनाए गए कंट्रोल रूम पर बाढ़ चौकियों के द्वारा जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है।
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वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि खादर क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रामीणों की जांच कर रही हैं। वहीं ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है, ताकि बीमारियों से बचाव हो सके।
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