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कार्तिक पूर्णिमा मेला: पूर्वजों की याद में दीपदान कर छलके आंसू

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ब्रजघाट गंगा में दीपदान करते युवा। (शोभित त्यागी) - फोटो : GARH
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कार्तिक पूर्णिमा मेला: पूर्वजों की याद में दीपदान कर छलके आंसू
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गढ़मुक्तेश्वर। कार्तिक शुक्ल पक्ष की चर्तुदशी पर सूर्यास्त के समय दीपदान से गंगानगरी जगमगा उठी। महाभारात काल से चली आ रही इस परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने नम आंखों से पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीये जलाकर गंगा को दान किए। इस परंपरा का निर्वहन कर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए।
ऐतिहासिक-पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा मेले को मिनी कुंभ भी कहा जाता है। जिसमें गंगा किनारे लाखों श्रद्धालु पड़ाव डालकर विभिन्न धार्मिक आयोजन करने के साथ ही गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस मेले का सबसे अहम पर्व चतुर्दशी को मनाया जाता है, जिसमें श्रद्धालु वर्ष भर में मृतक अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान करते हैं।
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सोमवार को कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी की देर शाम गढ़ खादर मेले समेत गंगा की दूसरी साइड के तिगरी और गंगा नगरी ब्रजघाट में चल रहे शहरी मेले में पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने दीपदान की परंपरा निभाई। उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान के दर्जनों जनपदों से आए लाखों लोगों ने साल भर के भीतर दिवंगत हुए अपने परिजनों और सगे संबंधियों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति की मन्नत मांगते हुए गंगा में दीपदान किया। सोमवार की देर शाम पांच बजे के बाद तीनों स्थानों पर गंगा के मुख्य घाटों पर भीड़ एकत्र हो गई। जहां गंगा लाखों लोगों ने हर-हर गंगे के जयकारों के बीच दीपदान किया। पटेरा और घास से तैयार किए गए आसनों पर जलते हुए दीपक रखकर गंगा की जलधारा में प्रवाहित कर दिया गया। दीपदान के बाद गंगा दोबारा गंगा स्नान कर श्रद्धालु वापसी के लिए रवाना हो गए।
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जगमग हुई गंगा
दीपदान के वक्त गंगा घाट आसमान में तारों जैसा दिखाई देने लगा। जिनका प्रतिबिंब गंगा में पड़ने से ऐसा लगा, जैसे गंगा मैय्या को आकाश गंगा का स्वरूप मिल गया हो। इस मनोहारी दृश्य को देखने के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ घाटों पर जुटी रही। देर रात तक श्रद्धालुओं ने दीपदान किया।
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