शारदीय नवरात्र आज से शुरू, मंदिरों में हुई सजावट
गढ़मुक्तेश्वर। शारदीय नवरात्र आज से आरंभ होगे। भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में व्रत का विशेष महत्व है। नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्र की तैयारी के लिए बाजार पूजन सामग्री से सज गए हैं।
शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र मौसम के बदलाव के समय आते है, व्रत मौसम के बदलाव से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को कम करते हैं। पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि नवरात्र व्रत भारतीय संस्कृति में केवल धर्म ही नहीं अपितु हमारे आचरण से भी जुड़े हैं। अलग-अलग व्रतों के माध्यम से हम समूची भारतीय धार्मिक संस्कृति और आध्यात्म के मर्म को समझ सकते हैं। व्रत का अर्थ है अपने आचारण को शुद्ध और स्वच्छ कर अपनी आत्मा की सफाई करना और नित्य कर्मों को थोड़ा विराम देना। यहां नित्यकर्म का मतलब सांसारिक गतिविधियों से है। दिनचार्य में हम कई प्रकार के आचरण करते हैं। लगातार भागदौड़ भरी जिंदगी में धर्म से थोड़ा विमुख होना भी संभव है। जिससे मनुष्य आध्यात्मिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करने लगते हैं। ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने का कार्य व्रत करते है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के दौरान विधि विधान से व्रत रखकर मां भगवती की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पुराणों में भी व्रतों को मानव सृष्टि के लिए कल्याणकारी माना जाता है। नवरात्रों में आदि शाक्ति की साधना और व्रत से साधकों को हर प्रकार की कष्टों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में भी रात्रि जागरण का विशेष विधान देखने को मिलता है। रात्रि में जागने का अर्थ है निद्रा को छिन्न-भिन्न कर अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करने के लिए मां दुर्गा की आराधना करना। जो लोग नवरात्र में व्रत रखते हैं, उन्हे कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिसमें तन और मन की शुद्धि सबसे पहले जरूरी है। व्रत का अर्थ सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए जन कल्याण के लिए कार्य करना भी है। हमें व्रत के समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हमसे जाने-अनजाने में किसी का अनिष्ट ना हो जाए।