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एंटी करप्शन टीम को चकमा देने वाले ठेकेदार को मिली जमानत

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एंटी करप्शन टीम को चकमा देने वाले ठेकेदार को मिली जमानत
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गढ़मुक्तेश्वर। ट्रैपिंग ऑपरेशन के दौरान एंटी करप्शन टीम की घेराबंदी को चकमा देकर रिश्वत से जुड़ी चार लाख की रकम का थैला लेकर भागने के आरोपी ठेकेदार को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है।
रिश्वतखोरी की धरपकड़ को गढ़ पालिका कार्यालय में मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने 28 जून की दोपहर बाद ट्रैपिंग ऑपरेशन किया था, लेकिन एंटी करप्शन टीम की सतर्कता और घेराबंदी को ठेकेदार भूपेंद्र सिंह निवासी बहजोई संभल ने पूरी तरह धता साबित कर दिया था। एंटी करप्शन टीम इंचार्ज केपी सिंह ने रिश्वत के तौर पर दी गई चार लाख की रकम वाला थैला लेकर ईओ अमिता वरुण के आवास की छत कूदकर फरार होने की रिपोर्ट दर्ज कराई हुई है। एंटी करप्शन टीम समेत गढ़ की पुलिस चार लाख की रकम लेकर फरार हुए भूपेंद्र की तलाश में तभी से लगातार दबिश देती आ रही थी, लेकिन 41 दिन की अवधि बीतने के बाद भी आरोपी ठेकेदार का कोई सुराग नहीं लग सका। अब एंटी करप्शन टीम और पुलिस द्वारा धरपकड़ के लिए बिछाए गए जाल को धता साबित करते हुए आरोपी ठेकेदार भूपेंद्र ने अपने ऊपर लगाए आरोपों में बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली है। आरोपी भूपेंद्र के अधिवक्ता ने बताया कि इससे पहले मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी, जिसके खारिज होने पर हाईकोर्ट की शरण में जाने पर अग्रिम जमानत मिल गई है।
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रिश्वत के रूप में दी गई चार लाख की रकम आखिर कहां गई
- आरोपी ठेकेदार को अग्रिम जमानत मिलने से एंटी करप्शन की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल
कुलदीप भारद्वाज
गढ़मुक्तेश्वर। कौन झूठा है और कौन सच्चा यह फैसला तो मुकदमे की सुनवाई के बाद में होगा। लेकिन शिकायत कर्ता द्वारा मुहैया कराई गई चार लाख की रकम का अभी तक बरामद न होना और आरोपी ठेकेदार को अग्रिम जमानत मिलने से एंटी करप्शन कार्य प्रणाली पर एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है।
ब्रजघाट निवासी ठेकेदार गौरव मिश्रा के अनुसार उसका नगर पालिका में करीब 50 लाख के निर्माण कार्यों का पेमेंट रुका हुआ था। वहीं एक मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के कारण कहीं पालिका ईओ उसे ब्लैक लिस्ट न कर दे। इसकी आड़ में पालिका ईओ पर दस लाख की रिश्वत मांगने का आरोप लगाकर एंटी करप्शन विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके आधार पर मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत के तौर पर देने के लिए उससे चार लाख की रकम लेकर ट्रैपिंग ऑपरेशन की योजना तैयार की थी। शिकायत कर्ता ठेकेदार गौरव मिश्रा को साथ लेकर एंटी करप्शन टीम ने 28 जून की शाम को गढ़ पालिका कार्यालय में घेराबंदी की थी। लेकिन ईओ अमिता वरुण को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का मंसूबा परवान चढ़ पाना तो दूर बल्कि शिकायत कर्ता ठेकेदार द्वारा मुहैया कराई गई चार लाख की रकम भी आंखों के सामने गायब हो गई थी। एंटी करप्शन टीम इंचार्ज केपी सिंह ने गढ़ कोतवाली में जो रिपोर्ट दर्ज कराई हुई है, उसमें चार लाख की रकम समेत ईओ के आवास पर मौजूद ठेकेदार भूपेंद्र द्वारा छत कूदकर फरार होने का उल्लेख किया हुआ है। करीब 41 दिनों की लंबी अवधि में आरोपी ठेकेदार की धरपकड़ होना तो दूर बल्कि चार लाख की जिस रकम को उसके द्वारा लेकर भागने का आरोप लगाया जा रहा है, वह भी अभी तक बरामद नहीं हो पाई है। आरोपी ठेकेदार को अब हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलना और चार लाख की रकम बरामद न होने से मेरठ की एंटी करप्शन टीम की कार्यप्रणाली फिर से सवालों के घेरे में आ गई है।
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सीओ अशोक शुक्ल का कहना है कि ट्रैपिंग ऑपरेशन के संबंध में मेरठ की एंटी करप्शन टीम द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर जांच पड़ताल हो रही है, जिसमें कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
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