78 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से खादर के लोगों में बाढ़ का डर
गढ़मुक्तेश्वर। जलस्तर में बढ़ोतरी से गंगा में फिर से खादर के गांवों में लोगों को बाढ़ का डर बना हुआ है। साथ ही ब्रजघाट गंगा किनारे पक्के घाट की दो सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। जबकि बिजनौर बैराज से छोड़ा गया साढ़े 78 हजार क्यूसेक पानी आने से जलस्तर में और बढ़ोतरी होनी तय मानी जा रही है।
पहाड़ों के साथ ही मंगलवार को मैदानों में हुई झमाझम बारिश से गढ़ खादर क्षेत्र के गांवों में फिर से बेचैनी बढ़ने लगी है, क्योंकि बारिश से जलस्तर में बढ़ोतरी होने से गंगा का उफान फिर बढ़ गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ने का सिलसिला न थमने से खादर क्षेत्र के गांवों से जुड़े संपर्क रास्तों समेत निचले जंगल में जलभराव होने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत झेलनी पड़ रही है। इसके साथ ही पशुओं के चारे का संकट भी झेलना पड़ रहा है। जलस्तर में बढ़ोतरी होने से बुधवार की शाम को ब्रजघाट गंगा किनारे बने पक्के घाट की दो सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। इससे स्नान समेत गंगा की जलधारा में अनुष्ठान करने वालों को काफी चौकसी बरतनी पड़ रही है। बाढ़ नियंत्रण आयोग का कहना है कि बुधवार की देर शाम को ब्रजघाट गंगा का जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 198.10 मीटर के निशान पर पहुंचने के बाद भी बढ़ोतरी होने का क्रम जारी चल रहा है। वहीं सिंचाई विभाग कंट्रोल का कहना है कि बिजनौर बैराज से बुधवार की देर शाम को साढ़े 78 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके बृहस्पतिवार की दोपहर तक ब्रजघाट पहुंचने से जलस्तर में और भी बढ़ोतरी होनी तय मानी जा रही है।
एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी का कहना है कि जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी पर हल्का लेखपालों समेत राजस्व कर्मियों से बारीकी के साथ नजर रखने को कहा गया है। फिलहाल बाढ़ आने जैसी कोई भी संभावना नहीं है मगर फिर भी अहतियाती तौर पर राहत चौकियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।