रिश्वत प्रकरण : पालिका ईओ को मिली अग्रिम जमानत
गढ़मुक्तेश्वर। ठेकेदार से दस लाख की रिश्वत मांगने के केस में नामजद पालिका ईओ को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने ईओ की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है।
ठेकेदार गौरव मिश्रा और उसके पिता से निर्माण कार्यों का 50 लाख का भुगतान दिलाने और उन्हें ब्लैक लिस्टेड न करने की आड़ में दस लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने 28 जून को गढ़ पालिका कार्यालय में ट्रैपिंग ऑपरेशन किया था। इसको लेकर दर्ज कराई गई रिपोर्ट में पालिका ईओ अमिता वरुण, माध्यम बने लिपिक अब्दुल और रिश्वत के तौर पर दी गई चार लाख की रकम लेकर फरार हुए ठेकेदार भूपेंद्र सिंह निवासी बहनोई संभल को आरोपी बनाया गया था। ठेकेदार भूपेंद्र बीस दिन बीतने के बाद भी पकड़ में नहीं आ पाया है, जबकि पालिका ईओ तभी से कानूनी राहत हासिल करने की जुस्तजू करती आ रही थीं। मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट में 11 जुलाई को जज पंकज मिश्रा द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज किए जाने के बाद ईओ ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। ईओ के वकील अतुल पांडेय के तर्कों का अभियोजन पक्ष और शिकायत कर्ता ठेकेदार गौरव मिश्रा के वकील ने पुरजोर विरोध किया। अतुल पांडेय के अनुसार संबंधित पक्षों की सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बैंच के जस्टिस रमेश सिन्हा ने बृहस्पतिवार को ईओ की अग्रिम जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया। जिससे रिश्वतखोरी के आरोप में घिरीं पालिका ईओ अमिता वरुण की गिरफ्तारी पर फिलहाल पूरी तरह रोक लग गई है।
ईओ की पैरवी करते हुए उनके अधिवक्ता ने रिश्वत मांगने के आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताने के साथ ही चार लाख की रकम लेकर फरार हुए आरोपी ठेकेदार भूपेंद्र से किसी भी तरह का वास्ता न होने का उल्लेख कर अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर करने की गुहार लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने से एंटी करप्शन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के साथ ही विवेचना कर रही पुलिस को भी तगड़ा झटका लगा है।